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कमला एकाक्षर चिन्तामणि मंत्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी

माँ कमला महालक्ष्मी श्रीं एकाक्षर चिन्तामणि मंत्र और ध्यान -रुद्रयामल तंत्र

श्रीदेवताश्री

कमला साधनामहालक्ष्मी साधनादशमहाविद्या साधनाएकाक्षर मंत्ररुद्रयामल तंत्र

तंत्र संदर्भ

स्रोत में '१०. महाविद्या श्रीकमला की उपासना' के अंतर्गत '(ख) मन्त्र-विधान के तीन प्रकार' में पहला 'एकाक्षर मन्त्र' दिया गया है।

मूल मंत्र

१. एकाक्षर मन्त्र

श्रीं

इसी को चिन्तामणि-मन्त्र भी कहा है। इसके ऋषि भृगु, निचृत् छन्द और श्री देवता हैं। 'श्रां, श्रीं, श्रूं, श्रैं, श्रौं, श्रः' इनसे कर-हृदयादिन्यास करने चाहिए।

ध्यान

कान्त्या कांचनसन्निभां हिमगिरिप्रख्यैश्चतुर्भिर्गजै-
र्हस्तोत्क्षिप्तहिरण्मयामृतघटैरासिच्यमानां श्रियम् ।
विभ्राणां वरमब्जयुग्ममभयं हस्तैः किरीटोज्ज्वलां,
क्षौमाबद्धनितम्बविम्बललितां वन्देऽरविन्दस्थिताम् ॥

बीज मंत्र

श्रींश्रांश्रूंश्रैंश्रौंश्रः

साधना विधि

स्रोत के अनुसार 'श्रीं' एकाक्षर मन्त्र को चिन्तामणि-मन्त्र कहा गया है। इसके लिए 'श्रां, श्रीं, श्रूं, श्रैं, श्रौं, श्रः' से कर-हृदयादिन्यास करना चाहिए और दिए हुए ध्यान का पाठ करना चाहिए।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • चिन्तामणि-मन्त्र
  • कर-हृदयादिन्यास
  • श्री उपासना
  • कमला साधना
  • ध्यान

लाभ

  • श्री उपासना
  • चिन्तामणि-मन्त्र साधना
  • कमला साधना

मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)

(ख) मन्त्र-विधान के तीन प्रकार १. एकाक्षर मन्त्र--'श्रीं' इसी को चिन्तामणि-मन्त्र भी कहा है। इसके ऋषि भृगु, निचृत् छन्द और श्री देवता हैं। 'श्रां, श्रीं, श्रूं, श्रैं, श्रौं, श्रः' इनसे कर-हृदयादिन्यास करने चाहिए। ध्यान है--कान्त्या कांचनसन्निभां हिमगिरिप्रख्यैश्चतुर्भिर्गजै- र्हस्तोत्क्षिप्तहिरण्मयामृतघटैरासिच्यमानां श्रियम् । विभ्राणां वरमब्जयुग्ममभयं हस्तैः किरीटोज्ज्वलां, क्षौमाबद्धनितम्बविम्बललितां वन्देऽरविन्दस्थिताम् ॥

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