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चतुरक्षरी अमृतमृत्युंजय मंत्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी

अमृतमृत्युंजय चतुरक्षरी मंत्र ॐ वं जूं सः -रुद्रयामल तंत्र

श्रीदेवतामहामृत्युंजय भगवान् महादेव

शिव साधनामहामृत्युंजय मंत्रअमृतमृत्युंजय मंत्रचतुरक्षरी मंत्ररुद्रयामल तंत्र

तंत्र संदर्भ

महामृत्युंजय के नाम से प्राप्त होने वाले विभिन्न मन्त्रों के स्वरूप में तीसरा रूप चतुरक्षरी अमृतमृत्युंजय मन्त्र दिया गया है। स्रोत में इसके अक्षर "ॐ वं जूं सः" बताए गए हैं।

मूल मंत्र

महामृत्युंजय के नाम से प्राप्त होने वाले विभिन्न मन्त्रों के स्वरूप

३. चतुरक्षरी अमृतमृत्युंजय मन्त्र

इस मन्त्र में "ॐ वं जूं सः" ये चार अक्षर हैं। इसका जप करने
से शरीर में बढ़े हुए ताप (गर्मी) की शीघ्र शान्ति होती है।

बीज मंत्र

वंजूंसः

प्रयोग — कब और कहाँ

  • अमृतमृत्युंजय मन्त्र
  • चतुरक्षरी मन्त्र
  • ताप शान्ति
  • शिव साधना

लाभ

  • शरीर में बढ़े हुए ताप (गर्मी) की शीघ्र शान्ति