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आद्याकाली मंत्र-जप-विधिरुद्रयामल तंत्रहिन्दी

आद्याकाली मंत्र और जप विधि -रुद्रयामल तंत्र

श्रीदेवताश्री आद्याकाली

शक्ति उपासनाकाली साधनादशमहाविद्यारुद्रयामल तंत्र

तंत्र संदर्भ

स्रोत में भगवती काली के उपासनातत्त्व के अन्तर्गत "(क) मंत्र-जप-विधि" में आद्याकाली मन्त्र का विनियोग, ऋष्यादिन्यास, कर-षडङ्ग-न्यास, ध्यान और मन्त्र दिया गया है।

मूल मंत्र

ह्रीं श्रीं क्रीं

ह्रीं श्रीं क्रीं परमेश्वरि कालिके ह्रीं श्रीं क्रीं स्वाहा।

बीज मंत्र

क्रींह्रींश्रीं

साधना विधि

स्रोत में पहले विनियोग, फिर ऋष्यादिन्यास, कर-षडङ्ग-न्यास और ध्यान के बाद आद्याकाली मन्त्र जप का क्रम दिया गया है। कर-षडङ्ग-न्यास में छह मन्त्रबीजों से पहले करन्यास और दूसरी बार अंगन्यास करने का निर्देश है।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • मंत्र-जप-विधि
  • श्रीआद्याकाली-कृपाप्रसादसिद्ध्यर्थ जप
  • करन्यास
  • अंगन्यास
  • ध्यान

लाभ

  • माता की अनन्य कृपा प्राप्त होती है

मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)

(क) मंत्र-जप-विधि १. विनियोगः -- ॐ अस्य श्रीआद्याकाली मन्त्रस्य ब्रह्म-ब्रह्मर्षय ऋषयो गायत्र्यादीनिच्छन्दांसि श्रीआद्याकालीदेवता क्रीं बीजं ह्रीं शक्तिः श्रीं कीलकं मम श्रीआद्याकाली-कृपाप्रसादसिद्ध्यर्थ जपे विनियोगः। २. ऋष्यादिन्यासः--ब्रह्म-ब्रह्मर्षिभ्यो ऋषिभ्यो नमः (शिरसि), गायत्र्यादिच्छन्दोभ्यो नमः (मुखे), श्रीआद्याकालीदेवताये नमः (हृदये), क्रीं बीजाय नमः (गुह्ये), ह्रीं शक्तये नमः (पादयोः), श्रीं कीलकाय नमः (नाभौ), विनियोगाय नमः (सर्वाङ्गे)। ३-४. कर-षडङ्ग-न्यासाः--"हां, हीं, हूं, हैं, हौं, हः"। इन छः मन्त्रबीजों में से एक-एक बीज का उच्चारण कर उनसे पहले करन्यास और दूसरी बार अंगन्यास करना चाहिए। ५. ध्यान--मेघाङ्गीं शशिशेखरां त्रिनयनां रक्ताम्बरं बिभ्रतीं, पाणिभ्यामभयं वरंच विलसद् रक्तारविन्दस्थिताम्। नृत्यन्तं पुरतो निपीय मधुरं माध्वीकमध्यं महाकालं वीक्ष्यविकासिताननवरामाद्यां भजे कालिकाम्॥ ६. मंत्र--'ह्रीं श्रीं क्रीं' (त्र्यक्षरी) अथवा--'ह्रीं श्रीं क्रीं परमेश्वरि कालिके ह्रीं श्रीं क्रीं स्वाहा।'

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