ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
अजपा-जप निवेदन मन्त्ररुद्रयामल तंत्रसंस्कृत + हिन्दी

अनाहतचक्र अजपा-जप निवेदन मन्त्र

श्रीदेवतापरमशिव

अजपा-जप-विधिअनाहतचक्ररुद्रयामल

मूल मंत्र

अनाहतचक्रे द्वादशदलपद्मे कं खं गं घं ङं चं छं जं झं ञं टं
ठं द्वादशाक्षरे षट्कोणयन्त्रे हरिणवाहने यं बीजे स्थिताय पार्वतीशक्ति-
सहिताय हेमवर्णाय परमशिवाय षट्सहस्रमजपाजपं निवेदयामि।

बीज मंत्र

कंखंगंघंङंचंछंजंझंञंटंठंयं

साधना विधि

अजपा-जप-विधि में अनाहतचक्र स्थित परमशिव को षट्सहस्रमजपाजपं निवेदयामि।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • श्वासक्रिया को परमात्मा का बिना प्रयत्न के होने वाला जप मानकर उन्हें अर्पित करे।
  • शरीर में विद्यमान छः चक्रों में स्थित देवताओं का स्मरण करते हुए किया जाता है।