अजपा-जप निवेदन मन्त्ररुद्रयामल तंत्रसंस्कृत + हिन्दी
अनाहतचक्र अजपा-जप निवेदन मन्त्र
श्रीदेवता✦ परमशिव
अजपा-जप-विधिअनाहतचक्ररुद्रयामल
मूल मंत्र
अनाहतचक्रे द्वादशदलपद्मे कं खं गं घं ङं चं छं जं झं ञं टं ठं द्वादशाक्षरे षट्कोणयन्त्रे हरिणवाहने यं बीजे स्थिताय पार्वतीशक्ति- सहिताय हेमवर्णाय परमशिवाय षट्सहस्रमजपाजपं निवेदयामि।
बीज मंत्र
कंखंगंघंङंचंछंजंझंञंटंठंयं
साधना विधि
अजपा-जप-विधि में अनाहतचक्र स्थित परमशिव को षट्सहस्रमजपाजपं निवेदयामि।
प्रयोग — कब और कहाँ
- श्वासक्रिया को परमात्मा का बिना प्रयत्न के होने वाला जप मानकर उन्हें अर्पित करे।
- शरीर में विद्यमान छः चक्रों में स्थित देवताओं का स्मरण करते हुए किया जाता है।