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प्रणति पद्य स्तुतिरुद्रयामल तंत्रहिन्दी

माँ छिन्नमस्ता प्रणति पद्य स्तुति -रुद्रयामल तंत्र

श्रीदेवताछिन्नमस्ता-भगवती

छिन्नमस्ता साधनामहाविद्या स्तुतितंत्र साधनारुद्रयामल तंत्र

तंत्र संदर्भ

स्रोत में श्रीछिन्नमस्ता-स्तवराजः के बाद 'प्रणति पद्य' शीर्षक से यह पद्य दिया गया है।

मूल मंत्र

व्याघ्राजिनरञ्जितस्वजघनेऽरण्ये प्रलम्बोदये,
खर्वेऽनिर्वचनीयपर्वसुभगे मुण्डावलीमण्डिते ।
कर्त्रीं कुन्दरुचिं विचित्रवनितां ज्ञाने दधाने पदे,
मातर्भक्तजनानुकम्पिनि महामायेऽस्तु तुभ्यं नमः॥

साधना विधि

स्रोत में इस पद्य के लिए अलग जप-विधि नहीं दी गई है; यह श्रीछिन्नमस्ता-स्तवराजः के तुरंत बाद 'प्रणति पद्य' शीर्षक से दिया गया है।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • छिन्नमस्ता प्रणति पद्य पाठ
  • छिन्नमस्ता स्तुति
  • छिन्नमस्ता-भगवती आराधना

मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)

प्रणति पद्य व्याघ्राजिनरञ्जितस्वजघनेऽरण्ये प्रलम्बोदये, खर्वेऽनिर्वचनीयपर्वसुभगे मुण्डावलीमण्डिते । कर्त्रीं कुन्दरुचिं विचित्रवनितां ज्ञाने दधाने पदे, मातर्भक्तजनानुकम्पिनि महामायेऽस्तु तुभ्यं नमः॥

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