२३ अक्षरी श्रीराम मन्त्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी
तेईस अक्षरी श्रीराम मंत्र दाशरथाय सीतावल्लभाय जप विधि -रुद्रयामल तंत्र
श्रीदेवता✦ श्रीराम
श्रीराम मंत्रतेईस अक्षरी मंत्रदाशरथाय मंत्रसीतावल्लभ मंत्रवैष्णव मंत्ररुद्रयामल तंत्र
तंत्र संदर्भ
स्रोत में २३ अक्षरी श्रीराम मन्त्र के अंतर्गत विनियोग, ऋष्यादि, कर हृदयादि, ध्यान और मूल मन्त्र दिया गया है। विनियोग में सर्वैश्वर्य, सर्वसौभाग्य, सर्वलोकवश्य और विद्या ज्ञान सिद्ध्यर्थे जप का उल्लेख है।
मूल मंत्र
२३ अक्षरी श्रीराम मन्त्र--अस्य श्रीराममन्त्रस्य अगस्त्य ऋषिः बृहतीच्छन्दः श्रीराम देवता ह्लीं बीजं नमः शक्तिः मम सर्वैश्वर्य-सर्व- सौभाग्य-सर्वलोकवश्य-विद्या ज्ञान सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः। ऋष्यादि०--अगस्त्यर्षये नमः (शिरसि), बृहतीच्छन्दसे नमः (मुखे) श्रीराम देवतायै नमः (हृदये), ह्लीं बीजाय नमः (गुह्ये) नमः शक्तये (पादयोः), विनियोगाय नमः (सर्वांगे)। कर हृदयादि--रां, रीं, हूं, ऐं, रः (इन छः बीजों से)। ध्यान--कालाम्भोधर कान्तिकान्तमनिशं वीरासनाध्यासितं, मुद्रां ज्ञानमयीं दधानमपरं हस्ताम्बुजं जानुनि। सीतां पार्श्वगतां सरोरुहकरां विद्युन्निभां राघवं, पश्यन्तं मुकुटाङ्गदादिविधाकल्पोज्ज्वलाङ्गं भजे॥ मूल मन्त्र--ॐ ह्लीं श्रीं द्रां दाशरथाय सीतावल्लभाय त्रैलोक्य नाथाय नमः।
बीज मंत्र
ह्लींरांरींहूंऐंरःॐश्रींद्रां
साधना विधि
स्रोत में २३ अक्षरी श्रीराम मन्त्र के लिए विनियोग, ऋष्यादि और कर हृदयादि के बाद ध्यान तथा मूल मन्त्र 'ॐ ह्लीं श्रीं द्रां दाशरथाय सीतावल्लभाय त्रैलोक्य नाथाय नमः' दिया गया है।
प्रयोग — कब और कहाँ
- श्रीराम मन्त्र जप
- तेईस अक्षरी मन्त्र
- सर्वैश्वर्य प्राप्ति
- सर्वसौभाग्य
- सर्वलोकवश्य
- विद्या ज्ञान सिद्धि
- ऋष्यादि
- कर हृदयादि
- ध्यान
लाभ
- सर्वैश्वर्य के लिए जप विनियोग दिया गया
- सर्वसौभाग्य के लिए जप विनियोग दिया गया
- सर्वलोकवश्य और विद्या ज्ञान सिद्ध्यर्थे जप का उल्लेख है
मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)
२३ अक्षरी श्रीराम मन्त्र--अस्य श्रीराममन्त्रस्य अगस्त्य ऋषिः बृहतीच्छन्दः श्रीराम देवता ह्लीं बीजं नमः शक्तिः मम सर्वैश्वर्य-सर्व- सौभाग्य-सर्वलोकवश्य-विद्या ज्ञान सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः। ऋष्यादि०--अगस्त्यर्षये नमः (शिरसि), बृहतीच्छन्दसे नमः (मुखे) श्रीराम देवतायै नमः (हृदये), ह्लीं बीजाय नमः (गुह्ये) नमः शक्तये (पादयोः), विनियोगाय नमः (सर्वांगे)। कर हृदयादि--रां, रीं, हूं, ऐं, रः (इन छः बीजों से)। ध्यान--कालाम्भोधर कान्तिकान्तमनिशं वीरासनाध्यासितं, मुद्रां ज्ञानमयीं दधानमपरं हस्ताम्बुजं जानुनि। सीतां पार्श्वगतां सरोरुहकरां विद्युन्निभां राघवं, पश्यन्तं मुकुटाङ्गदादिविधाकल्पोज्ज्वलाङ्गं भजे॥ मूल मन्त्र--ॐ ह्लीं श्रीं द्रां दाशरथाय सीतावल्लभाय त्रैलोक्य नाथाय नमः।
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