ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
गायत्री मन्त्ररुद्रयामल तंत्रसंस्कृत + हिन्दी

गुरु गायत्री

श्रीदेवतागुरु

श्री गुरु उपासनागुरु गायत्रीरुद्रयामल

मूल मंत्र

ॐ वेदादिगुरुदेवाय विद्महे, परमगुरवे धीमहि, तन्नो गुरुः प्रचोदयात्‌।

साधना विधि

बिन्दु में पुनः गुरु और उनके ऊपर वाले भाग में परमगुरु, परात्पर गुरु और परमेष्ठि गुरु की भक्तिपूर्वक षोडशोपचार-पूजा करें।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • गुरु गायत्री के द्वारा भी यह पूजा-विधान सम्पन्न किया जा सकता है।