गायत्री मन्त्ररुद्रयामल तंत्रसंस्कृत + हिन्दी
गुरु गायत्री
श्रीदेवता✦ गुरु
श्री गुरु उपासनागुरु गायत्रीरुद्रयामल
मूल मंत्र
ॐ वेदादिगुरुदेवाय विद्महे, परमगुरवे धीमहि, तन्नो गुरुः प्रचोदयात्।
साधना विधि
बिन्दु में पुनः गुरु और उनके ऊपर वाले भाग में परमगुरु, परात्पर गुरु और परमेष्ठि गुरु की भक्तिपूर्वक षोडशोपचार-पूजा करें।
प्रयोग — कब और कहाँ
- गुरु गायत्री के द्वारा भी यह पूजा-विधान सम्पन्न किया जा सकता है।