नवग्रह जपनीय मन्त्र तालिकारुद्रयामल तंत्रहिन्दी
नवग्रह जपनीय मंत्र जप संख्या और समिधा -रुद्रयामल तंत्र
श्रीदेवता✦ नवग्रह
नवग्रह साधनाग्रह शान्तिजप मन्त्रतांत्रिक ग्रह मन्त्ररुद्रयामल तंत्र
तंत्र संदर्भ
स्रोत में '(ङ) अन्य ग्रहों के विविध उपाय' के अंतर्गत सूर्य के अतिरिक्त चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु ग्रहों की प्रसन्नता तथा पीड़ाओं के निवारण के लिए वैदिक और तान्त्रिक मन्त्र-प्रयोग की बात कहकर 'नवग्रह--सर्वांगीण परिचय तालिका' में प्रत्येक ग्रह का जपनीय मन्त्र, जप संख्या और समिधा दी गई है।
मूल मंत्र
(ङ) अन्य ग्रहों के विविध उपाय सूर्य के अतिरिक्त चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु ग्रहों को प्रसन्नता और उनके द्वारा प्राप्त हो रही पीड़ाओं को नष्ट करने के लिए वैदिक मन्त्र और तान्त्रिक मन्त्रों का प्रयोग भी रुद्रयामल द्वारा प्रतिपादित है। ग्रहों के सर्वांगीण परिचय के लिए एक तालिका यहाँ प्रस्तुत है। नवग्रह--सर्वांगीण परिचय तालिका जपनीय मन्त्र / जप संख्या / समिधा सूर्य -- ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः -- ७००० -- अर्क चन्द्र -- ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः सोमाय नमः -- ११००० -- पलाश मंगल -- ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः -- १०००० -- खदिर बुध -- ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः -- ९००० -- अपामार्ग गुरु -- ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः -- १९००० -- पीपल शुक्र -- ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः -- १६००० -- गूलर शनि -- ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः -- २३००० -- शमी राहु -- ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः -- १८००० -- दूर्वा केतु -- ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः -- १७००० -- कुशा
बीज मंत्र
ह्रांह्रींह्रौंश्रांश्रींश्रौंक्रांक्रींक्रौंब्रांब्रींब्रौंग्रांग्रींग्रौंद्रांद्रींद्रौंप्रांप्रींप्रौंभ्रांभ्रींभ्रौंस्त्रांस्त्रींस्त्रौं
साधना विधि
स्रोत में कहा गया है कि सूर्य के अतिरिक्त चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु ग्रहों की प्रसन्नता और उनसे प्राप्त पीड़ाओं को नष्ट करने के लिए वैदिक मन्त्र और तान्त्रिक मन्त्रों का प्रयोग रुद्रयामल द्वारा प्रतिपादित है। इसके बाद नवग्रह सर्वांगीण परिचय तालिका में प्रत्येक ग्रह का जपनीय मन्त्र, जप संख्या और समिधा दी गई है।
प्रयोग — कब और कहाँ
- नवग्रह जप
- ग्रह प्रसन्नता
- ग्रह पीड़ा निवारण
- जप संख्या अनुसार ग्रह साधना
- समिधा सहित ग्रह मन्त्र प्रयोग
लाभ
- ग्रहों की प्रसन्नता के लिए प्रयोग बताया गया
- ग्रहों से प्राप्त पीड़ाओं को नष्ट करने के लिए प्रयोग बताया गया
- अशुभ फल-दान काल में करने योग्य उपायों के ज्ञान के लिए तालिका दी गई
मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)
(ङ) अन्य ग्रहों के विविध उपाय सूर्य के अतिरिक्त चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु ग्रहों को प्रसन्नता और उनके द्वारा प्राप्त हो रही पीड़ाओं को नष्ट करने के लिए वैदिक मन्त्र और तान्त्रिक मन्त्रों का प्रयोग भी रुद्रयामल द्वारा प्रतिपादित है। ग्रहों के सर्वांगीण परिचय के लिए एक तालिका यहाँ प्रस्तुत है, जिसके द्वारा पाठक स्वयं ही उनकी वास्तविक स्थिति का अनुमान कर सकते हैं और उनके अशुभ फल-दान काल में करने योग्य उपायों का भी स्वयं ज्ञान प्राप्त कर उचित लाभ प्राप्त करें। नोट : पाठकगण को सूचित किया जाता है कि नवग्रह परिचय तालिका पृष्ठ २५६ पर देखें। नवग्रह--सर्वांगीण परिचय तालिका जपनीय मन्त्र / जप संख्या / समिधा सूर्य -- ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः -- ७००० -- अर्क चन्द्र -- ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः सोमाय नमः -- ११००० -- पलाश मंगल -- ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः -- १०००० -- खदिर बुध -- ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः -- ९००० -- अपामार्ग गुरु -- ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः -- १९००० -- पीपल शुक्र -- ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः -- १६००० -- गूलर शनि -- ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः -- २३००० -- शमी राहु -- ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः -- १८००० -- दूर्वा केतु -- ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः -- १७००० -- कुशा
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