परशुराम गायत्री मंत्र और सात्त्विक ध्यानरुद्रयामल तंत्रहिन्दी
भगवान परशुराम गायत्री मंत्र और सात्त्विक ध्यान -रुद्रयामल तंत्र
श्रीदेवता✦ श्री परशुराम
परशुराम उपासनागायत्री मंत्रछिन्नमस्ता साधनातंत्र साधनारुद्रयामल तंत्र
तंत्र संदर्भ
स्रोत में '(ग) परशुरामोपासना' के अंतर्गत परशुराम गायत्री, उसका ऋषि-छन्द-देवता विवरण और सात्त्विक ध्यान दिया गया है।
मूल मंत्र
ब्रह्मक्षत्राय विद्महे, क्षत्रियान्ताय धीमहि । तन्नो रामः प्रचोदयात् । सात्त्विक ध्यान सात्त्विकं श्वेतवर्णं च भस्मोद्धूलितविग्रहम् । अग्निहोत्रस्थलासीनं नानामुनिगणावृतम् ॥ कम्बलासनमारूढं स्वर्णतारकुशाङ्गुलिम् । श्वेतवस्त्रद्वयोपेतं जुह्वन्तं राममाश्रये ॥
साधना विधि
स्रोत के अनुसार परशुरामजी की उपासना सात्त्विक, राजस और तामस रूप में की जाती है। छिन्नमस्ता के यन्त्र में ही उनकी पूजा होती है और परशुराम गायत्री का जप किया जाता है।
प्रयोग — कब और कहाँ
- परशुराम गायत्री जप
- परशुरामजी की सात्त्विक उपासना
- छिन्नमस्ता यन्त्र में परशुराम पूजा
- राज्य एवं वैभव प्राप्ति
लाभ
- राज्य एवं वैभव प्रदान करने वाली
मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)
(ग) परशुरामोपासना परशुरामजी और छिन्नमस्ता में ऐक्य है। अतः परशुरामजी की उपासना सात्त्विक, राजस और तामस रूप में की जाती है तब छिन्न- मस्ता के यन्त्र में ही उनकी पूजा होती है और परशुराम गायत्री का जप किया जाता है। यथा-- ब्रह्मक्षत्राय विद्महे, क्षत्रियान्ताय धीमहि । तन्नो रामः प्रचोदयात् । यह परशुराम गायत्री अद्भुत है। राज्य एवं वैभव प्रदान करने वाली है। इसके ऋषि भारद्वाज, छन्द गायत्री, देवता श्री परशुराम हैं। इनका सात्त्विक ध्यान इस प्रकार है-- सात्त्विकं श्वेतवर्णं च भस्मोद्धूलितविग्रहम् । अग्निहोत्रस्थलासीनं नानामुनिगणावृतम् ॥ कम्बलासनमारूढं स्वर्णतारकुशाङ्गुलिम् । श्वेतवस्त्रद्वयोपेतं जुह्वन्तं राममाश्रये ॥
[object Object]