यन्त्र-वर्णन श्लोकरुद्रयामल तंत्रसंस्कृत + हिन्दी
गुरु-यन्त्र स्वरूप श्लोक
श्रीदेवता✦ श्रीगुरु
श्री गुरु उपासनागुरु-यन्त्ररुद्रयामल
मूल मंत्र
बिन्दु-त्रिकोणं वसुकोण-विम्बं, वृत्ताष्टपत्रं शिखिवृत्तयुक्तम्। धरागृहं वह्नितुरीभिराद्यं यन्त्रं गुरोर्देवि मया प्रदिष्टम्॥
साधना विधि
इस यन्त्र को सिन्दूर, कुंकुम अथवा चन्दन से भूर्जपत्र अथवा चन्दन के पट्टे पर बनाकर पहले प्रतिष्ठा करें।
प्रयोग — कब और कहाँ
- इसके अनुसार १. बिन्दु, २. त्रिकोण, ३. अष्टकोण, ४. अष्टदल तथा ५. भूपुर से यह यंत्र बनता है।