ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
यन्त्र-वर्णन श्लोकरुद्रयामल तंत्रसंस्कृत + हिन्दी

गुरु-यन्त्र स्वरूप श्लोक

श्रीदेवताश्रीगुरु

श्री गुरु उपासनागुरु-यन्त्ररुद्रयामल

मूल मंत्र

बिन्दु-त्रिकोणं वसुकोण-विम्बं, वृत्ताष्टपत्रं शिखिवृत्तयुक्तम्‌।
धरागृहं वह्नितुरीभिराद्यं यन्त्रं गुरोर्देवि मया प्रदिष्टम्‌॥

साधना विधि

इस यन्त्र को सिन्दूर, कुंकुम अथवा चन्दन से भूर्जपत्र अथवा चन्दन के पट्टे पर बनाकर पहले प्रतिष्ठा करें।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • इसके अनुसार १. बिन्दु, २. त्रिकोण, ३. अष्टकोण, ४. अष्टदल तथा ५. भूपुर से यह यंत्र बनता है।