ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
अष्टोत्तरशत नामावली स्तोत्ररुद्रयामल तंत्रसंस्कृत + हिन्दी

आपदुद्धारक भैरव 108 नामावली मंत्र -रुद्रयामल तंत्र

श्रीदेवताआपदुद्धारक श्री भैरव

भगवान् भैरवनाथ की कृपा-प्राप्तिअष्टोत्तरशत-भैरवनामावलीभैरव साधना

तंत्र संदर्भ

रुद्रयामल में कहा गया है कि—आपदुद्धारक श्री भैरव के सहस्र, दशसहस्र और अरबों नाम हैं। उन्हीं का सार-संग्रह करके १०८ नामों का संग्रह बतलाने की भगवती पार्वती ने शिवजी से प्रार्थना की थी। स्मरणमात्र से सर्वकामनाओं को पूर्ण करने वाली यह नामावली स्तोत्र-रूप में वर्णित है—

मूल मंत्र

ॐ ह्रीं भैरवो भूतनाथश्च भूतात्मा भूतभावनः।
क्षेत्रज्ञः क्षेत्रपालश्च क्षेत्रदः क्षत्रियो विराट् ॥१॥

श्मशानवासी मांसाशी खर्पराशी स्मरान्तकः।
रक्तपः पानपः सिद्धः सिद्धिदः सिद्धसेवितः ॥२॥

कङ्कालः कालशमनः कलाकाष्ठातनुः कविः।
त्रिनेत्रो बहुनेत्रश्च तथा पिङ्गल-लोचनः ॥३॥

शूलपाणिः खड्गपाणिः कङ्काली धूम्रलोचनः।
अभीरुर्भैरवीनाथो भूतपो योगिनीपतिः ॥४॥

धनदोऽधनहारी च धनवान् प्रतिभानवान्।
नागहारो नागपाशो व्योमकेशः कपालभृत् ॥५॥

कालः कपालमाली च कमनीयः कलानिधिः।
त्रिलोचनो ज्वलन्नेत्रस्त्रिशिखी च विलोचनः ॥६॥

विनीततनयो डिम्भशान्तः शान्तजनप्रियः।
बटुको बहुवेशश्च खट्वाङ्गी वरधारकः ॥७॥

भूताध्यक्षः पशुपतिभिक्षुकः परिचारकः।
धूर्तो दिगम्बरः शूरो हरिणः पाण्डुलोचनः ॥८॥

प्रशान्तः शान्तिदः शुद्धः शङ्कर-प्रियबान्धवः।
अष्टमूर्तिनिधीशश्च ज्ञानचक्षुस्तपोमयः ॥९॥

अष्टाधारः षडाधारः सर्पयुक्तः शिखीसखः।
भूधरो भूधराधीशो भूपतिर्भूधरात्मजः ॥१०॥

कङ्कालधारी मुण्डी च आन्त्रयज्ञोपवीतवान्।
जम्भणो मोहनः स्तम्भी मारणः क्षोभणस्तथा ॥११॥

शुद्धनीलांजन-प्रख्यो दैत्यहा मुण्डभूषितः।
बलिभुग् बलिभुङ्नाथो बालोऽबालपराक्रमः ॥१२॥

सर्वापत्तारणो दुर्गो दुष्टभूत-निषेवितः।
कामी कलानिधिकान्तः कामिनीवशकृद् वशी ॥१३॥

जगद्रक्षाकरोऽनन्तो मायामन्त्रौषधीमयः।
सर्वसिद्धिप्रदो वैद्यः प्रभविष्णुः करोतु शम् ॥१४॥

बीज मंत्र

ह्रीं

साधना विधि

इस स्तोत्र के पहले और अन्त में विनियोग, न्यास, ध्यान आदि का भी विधान है। यह स्तोत्र अत्यन्त प्रभावशाली एवं सद्यः फलदायी है। इसके १०८ नाम अलग-अलग करके प्रत्येक के साथ आरम्भ में 'ॐ ह्रीं' तथा अन्त में 'नमः' पद लगाकर नाम को चतुर्थ्यन्त बनाकर पाठ तथा पूजन भी करने की पद्धति है। पाठ के भी अनेक प्रकार हैं जिनमें १. सृष्टि, २. स्थिति, ३. संहारक्रम, ४. सृष्टि-संहार-सृष्टि, ५. लोम-विलोम आदि विशिष्ट हैं।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • स्मरणमात्र से सर्वकामनाओं को पूर्ण करने वाली नामावली
  • १०८ नामों का पाठ
  • नाम को चतुर्थ्यन्त बनाकर पाठ तथा पूजन

लाभ

  • स्मरणमात्र से सर्वकामनाओं की पूर्णता
  • अत्यन्त प्रभावशाली एवं सद्यः फलदायी
  • पाठ तथा पूजन में प्रयोग