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आसुरी गायत्री मन्त्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी

माँ आसुरी गायत्री मंत्र जप विधि -रुद्रयामल तंत्र

श्रीदेवताआसुरी दुर्गा

दुर्गा साधनाआसुरी गायत्री मंत्रआसुरी दुर्गा मंत्रतांत्रिक मंत्र प्रयोगरुद्रयामल तंत्र

तंत्र संदर्भ

स्रोत में आसुरी-दुर्गा मन्त्र-प्रयोग के अंतर्गत '३. अन्य प्रयोग' में पहला प्रयोग आसुरी गायत्री जप के रूप में दिया गया है।

मूल मंत्र

३. अन्य प्रयोग--(१) लाल कम्बल का आसन बिछाकर उस पर आसुरी गायत्री का जप करे। गायत्री मन्त्र--ॐ ह्रीं आसुरि-दिव्यायै विद्महे, ॐ ऐं अथर्ववेदाय धीमहि ॐ ह्लौं हुं फट् प्रचोदयात्।

बीज मंत्र

ह्रींऐंह्लौंहुंफट्

साधना विधि

लाल कम्बल का आसन बिछाकर उस पर आसुरी गायत्री का जप करने का निर्देश दिया गया है। स्रोत में इसके बाद 'इससे इच्छित कार्य में सफलता मिलती है' कहा गया है।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • आसुरी गायत्री जप
  • लाल कम्बल आसन
  • इच्छित कार्य में सफलता
  • आसुरी-दुर्गा अन्य प्रयोग

लाभ

  • इच्छित कार्य में सफलता
  • आसुरी गायत्री जप
  • लाल कम्बल आसन सहित प्रयोग

मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)

३. अन्य प्रयोग--(१) लाल कम्बल का आसन बिछाकर उस पर आसुरी गायत्री का जप करे। गायत्री मन्त्र--ॐ ह्रीं आसुरि-दिव्यायै विद्महे, ॐ ऐं अथर्ववेदाय धीमहि ॐ ह्लौं हुं फट् प्रचोदयात्। इससे इच्छित कार्य में सफलता मिलती है।

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