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कुण्डलिनी मन्त्ररुद्रयामल तंत्रसंस्कृत + हिन्दी

कुण्डलिनी मूल मन्त्र

श्रीदेवताकुण्डलिनी

कुण्डलिनी साधनारुद्रयामल

मूल मंत्र

ऐं हीं श्रीं

बीज मंत्र

ऐंहींश्रीं

साधना विधि

प्राणवायु का निरोध करके मूलाधार में चतुर्दल कमल के बीच त्रिकोणरूप पीठ में स्थित ज्योतिर्लिंग को आवेष्टित कर विराजमान साढ़े तीन वलयवाली कुण्डलिनी को 'ॐ हूं' इस बीज से जगाकर 'ऐं हीं श्रीं' इस मन्त्र का जप करते हुए ध्यान करें। मानसिक पूजा करने के पश्चात्‌ यथाशक्ति मूलमन्त्र 'ऐं हीं श्रीं' का जप करें और समर्पण करके प्रार्थना करें।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • इस मन्त्र का जप करते हुए ध्यान करें।
  • मानसिक पूजा करने के पश्चात्‌ यथाशक्ति मूलमन्त्र का जप करें और समर्पण करके प्रार्थना करें।