अम्बिका दुर्गा मंत्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी
माँ अम्बिका दुर्गा मंत्र विनियोग न्यास ध्यान और जप विधि -रुद्रयामल तंत्र
श्रीदेवता✦ अम्बिकादुर्गा
दुर्गा साधनानौ दुर्गा मंत्रअम्बिका दुर्गा मंत्ररुद्रयामल तंत्र
तंत्र संदर्भ
स्रोत में '११. शान्तिदुर्गादि नौ दुर्गाओं के मन्त्र-विधान' के अंतर्गत '५. अम्बिका दुर्गा' में अम्बिका दुर्गा मन्त्र का विनियोग, ऋष्यादिन्यास, कर-हृदयादिन्यास, ध्यान और मूलमन्त्र दिया गया है।
मूल मंत्र
५. अम्बिका दुर्गा विनियोग अस्य श्री अम्बिकादुर्गामन्त्रस्य मार्कण्डेयऋषिः अनुष्टुप्छन्दः श्रीअम्बिकादुर्गा देवता ॐ बीजं श्रीं शक्तिः दुं कीलकं मम श्री अम्बिकादुर्गा महालक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे मन्त्रजपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यास मार्कण्डेय ऋषये नमः (शिरसि) । अनुष्टुप् छन्दसे नमः (मुखे) । अम्बिकादुर्गादेवतायै नमः (हृदये) । ॐ बीजाय नमः (गुह्ये) । श्रीं शक्तये नमः (पादयोः) । कीलकाय नमः (नाभौ) । विनियोगाय नमः (सर्वांगे) । कर-हृदयादिन्यास "श्रां श्रीं श्रूं श्रैं श्रौं श्रः" (इन छह बीजों से क्रमशः) । ध्यान या सा पद्मासनस्था पृथुलकटितटी पद्मपत्रायताक्षी, गम्भीरावर्तनाभिः स्तनभरनमिता शुभ्रवस्त्रोत्तरीया । लक्ष्मीर्दिव्यैर्गजेन्द्रमणिगणखचितैः स्नापिता हेमकुम्भैः-- नित्यं सा पद्महस्ता मम वसतु गृहे सर्वमाङ्गल्ययुक्ता ॥ मूलमन्त्र "ॐ श्रीं दुर्गायै नमः।"
बीज मंत्र
ॐश्रींदुं
साधना विधि
स्रोत के अनुसार अम्बिका दुर्गा मन्त्रजप के लिए पहले विनियोग करना है। फिर ऋष्यादिन्यास और कर-हृदयादिन्यास करके ध्यान के बाद मूलमन्त्र का जप बताया गया है।
प्रयोग — कब और कहाँ
- अम्बिका दुर्गा मन्त्रजप
- श्री अम्बिकादुर्गा महालक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थ विनियोग
- ऋष्यादिन्यास
- कर-हृदयादिन्यास
- ध्यान और मूलमन्त्र जप
लाभ
- श्री अम्बिकादुर्गा महालक्ष्मीप्रसादसिद्धि
- अम्बिका दुर्गा मन्त्रजप
- ऋष्यादिन्यास
- कर-हृदयादिन्यास
- ध्यान
मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)
५. अम्बिका दुर्गा--अस्य श्री अम्बिकादुर्गामन्त्रस्य मार्कण्डेय- ऋषिः अनुष्टुप्छन्दः श्रीअम्बिकादुर्गा देवता ॐ बीजं श्रीं शक्तिः दुं कीलकं मम श्री अम्बिकादुर्गा महालक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे मन्त्रजपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यास--मार्कण्डेय ऋषये नमः (शिरसि) । अनुष्टुप् छन्दसे नमः (मुखे) । अम्बिकादुर्गादेवतायै नमः (हृदये) । ॐ बीजाय नमः (गुह्ये) । श्रीं शक्तये नमः (पादयोः) । कीलकाय नमः (नाभौ) । विनियोगाय नमः (सर्वांगे) । कर-हृदयादिन्यास--"श्रां श्रीं श्रूं श्रैं श्रौं श्रः" (इन छह बीजों से क्रमशः) । ध्यान--या सा पद्मासनस्था पृथुलकटितटी पद्मपत्रायताक्षी, गम्भीरावर्तनाभिः स्तनभरनमिता शुभ्रवस्त्रोत्तरीया । लक्ष्मीर्दिव्यैर्गजेन्द्रमणिगणखचितैः स्नापिता हेमकुम्भैः-- नित्यं सा पद्महस्ता मम वसतु गृहे सर्वमाङ्गल्ययुक्ता ॥ मूलमन्त्र--"ॐ श्रीं दुर्गायै नमः।"
[object Object]