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हिन्दी नामावली पाठ / चौपाई स्तोत्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी

भैरव 108 नाम हिन्दी नामावली पाठ -रुद्रयामल तंत्र

श्रीदेवताबटुक भैरव

भैरव साधनाहिन्दी नामावली पाठभगवान् भैरवनाथ की कृपा-प्राप्ति

तंत्र संदर्भ

इस स्तोत्र का 'हिन्दी-चौपाई' में पाठ भी प्रचलित है, जो इस प्रकार है—

मूल मंत्र

ध्यान—
कर कपाल शुभ सुन्दर राजे, कुंडल कर्ण दण्ड कर साजे।
तरुण-तिमिर सम नील स्वरूपा, व्याल-यज्ञ उपवीत अनूपा॥
विघ्ननाशि महरक्षक पूरे, साधु सिद्धिप्रद रण अति शूरे।
जय जय बटुकनाथ सिद्धिदायक, कृपासिन्धु प्रभु भक्त सहायक॥

मूल पाठ—
नमो नमो भैरव सिद्धिदाता। भूतनाथ भवभय ते त्राता।
भूतात्मा भूतल उजियारे। बटुक भूतभावन मतवारे ॥१॥

क्षेत्रद क्षेत्रपाल सुरराटा। क्षत्रियवर क्षेत्रज्ञ बिराटा।
जय श्मशानवासी शुभनामा। मांसाशी प्रभु मंगलदाता ॥२॥

नमो खर्पराशी भगवन्ता। जय स्मरान्तक रूप अनन्ता।
हे खरान्तक अतिबलवाना। है सर्वान्तक सर्व सुजाना ॥३॥

रक्तप तोहि बहुरि सिर नाओं। पानप सिद्ध हृदयमंह ध्याओं।
रक्तपान तत्पर बलि जाओं। पुनि पुनि प्रभु तोहि सीस नवाओं ॥४॥

सिद्धिद देव सिद्धि के नाथा। सिद्ध सुसेवित सेवक साथा।
जय कंकाल कुटिल-नर-नाशी। कालशमन जय सब-सुखराशी ॥५॥

नमो कलाकाष्ठा तनुधारी। जय-जय कवि सर्वज्ञ सुखारी।
जय त्रिनेत्र बहुनेत्र नमामि। पिङ्गल-लोचन शरण व्रजामि ॥६॥

शूलपाणि जय दीन-दयाला। खड्गपाणि जय परम-कृपाला।
कंकाली तोहि कोटि प्रणामा। जयतु धूम्रलोचन शुभ नामा ॥७॥

जय अभीरु जय भैरवनाथा। भूतप योगिनिपति शुचि गाथा।
नमो धनदः धनहारी देवा। जय धनवान विश्वसुख देवा ॥८॥

जय प्रतिभानवान सुर-स्वामी। जय प्रतिभावित अन्तर्यामी।
नागहार तव चरण नमामि। देव दयामय सदा भजामि ॥९॥

नागपाश जय जय सुरसांई। व्योमकेश जय प्रभो गुसाई।
नागकेश जय जय सुरराया। कीजे नाथ भक्त पे दाया ॥१०॥

जय कपालभृत काल कराला। जय कपालमाली जगपाला।
जय कमनीय कलानिधि त्राता। जयतु त्रिलोचन आनन्ददाता ॥११॥

ज्वलन्नेत्र त्रिशिखी तोहि ध्याओं। नमो विलोचन सब सिद्धि पाओं।
जय विनीततनय सुखराशी। जय हो डिम्भ नित्य अविनाशी ॥१२॥

जय है शान्ताभक्त-वरदाई। डिम्भ शान्त प्रभु भक्त सहाई।
शान्तजनप्रिय दीन-दयाला। नमो बटुक बहुवेष कृपाला ॥१३॥

जय खट्वाङ्गी वरधारक देवा। भूताध्यक्ष करें सुख सेवा।
जय-जय पशुपति भिक्षुक देवा। जय परिचारक जन-मन-मेवा ॥१४॥

जय परिवारक जग के स्वामी। तुम कहं बारम्बार नमामि।
धूर्त दिगम्बर शूर भजामि। हरिण पाण्डुलोचन जय स्वामी ॥१५॥

जय प्रशान्त हे शान्तिद शुद्धा। सिद्ध युद्ध-जयकारी बुद्धा।
है शंकर प्रिय बान्धव नामी। शंकरप्रिय-बान्धव शुभकामी ॥१६॥

अष्टमूर्ति जय देव निधीशा। ज्ञानचक्षु तपोमय ईशा।
अष्टाधार नमो सुर-स्वामी। षडाधार जग अन्तर्यामी ॥१७॥

सर्पयुक्त शिखीसख भूधर जय। जय भूधर-अधीश मंगलमय।
भूपति भूधर-आत्मज दाता। भूधर आत्मक सब जगत्राता ॥१८॥

जय कङ्कालधारि सुरनाथा। मुण्डी तोहि नवावों माथा।
नागयज्ञ उपवीत विराजं। आन्त्रयज्ञोपवीत सुसाजं ॥१९॥

जृम्भण मोहन स्तम्भन स्वामी। मारणक्षोभण जगसुखकामी।
है गुरुदेव ज्ञान के दाता। भोग-मोक्षप्रद कृपा-विधाता ॥२०॥

शुद्ध नील अंजन प्रख्याता। देव दैत्यहा सेवक त्राता।
मुण्ड विभूषित छवि सरसाये। सकल सुमङ्गल मूल सहाये ॥२१॥

बलिभुक् तुम प्रभु बलिभुङ्नाथा। बाल अबाल पराक्रमसाथा।
जय सर्वापत्तारण स्वामी। दुर्गरूप प्रभु अन्तर्यामी ॥२२॥

दुष्ट भूत-निषेवित देवा। कामी कामफलप्रद सेवा।
जयतु कलानिधि कान्त सुनामी। कामिनीवशकृत तोहि नमामि ॥२३॥

सकल जगत वशीकृत नामा। कामिनिवशकृत वशी ललामा।
देव जगत रक्षा कर जय-जय। अनन्त माया मन्त्रौषधि-मय ॥२४॥

सर्वसिद्धिप्रद वैद्य महाना। हे प्रभु विष्णु विवेक निधाना।
तुम विभु अखिल विश्व सरसाओ। भक्त भरण करि सुयश कमाओ ॥२५॥

अष्टोत्तर शतनाम स्वरूपा। कल्पवृक्ष यहु परम अनूपा।
जपत जीव सब मंगल पावें। सकल कामना तुरत पुरावें ॥२६॥

दुरित भूत भय मारी भीती। जपत मिटे पल में सब ईती।
राज शत्रु ग्रह भय नाहि लागे। भैरव स्तवन करत दुख भागे ॥२७॥

अष्टोत्तर शतनाम शुभ, जपत धरें नित ध्यान।
तिनकहें भैरव लाडिले, सदा करें कल्याण ॥२८॥

साधना विधि

स्रोत में इस खण्ड को 'हिन्दी नामावली पाठ' के रूप में दिया गया है।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • हिन्दी-चौपाई पाठ
  • भैरव १०८ नामावली पाठ
  • भैरव स्तवन

लाभ

  • भैरव १०८ नामों का हिन्दी पाठ
  • भैरव स्तवन
  • सकल कामना तुरत पुरावें