गिरिदुर्गा मंत्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी
माँ गिरिदुर्गा मंत्र विनियोग न्यास ध्यान और जप विधि -रुद्रयामल तंत्र
श्रीदेवता✦ गिरिदुर्गा
दुर्गा साधनानौ दुर्गा मंत्रगिरिदुर्गा मंत्ररुद्रयामल तंत्र
तंत्र संदर्भ
स्रोत में '११. शान्तिदुर्गादि नौ दुर्गाओं के मन्त्र-विधान' के अंतर्गत '४. गिरिदुर्गा' में गिरिदुर्गा मन्त्र का विनियोग, ऋष्यादिन्यास, कर-हृदयादिन्यास, ध्यान और मूलमन्त्र दिया गया है।
मूल मंत्र
४. गिरिदुर्गा विनियोग अस्य श्रीगिरिदुर्गामन्त्रस्य नारायणऋषिः अनुष्टुप्छन्दः गिरिदुर्गादेवता हां बीजं हीं शक्तिः क्लीं कीलकं मम श्रीगिरिदुर्गाप्रसादसिद्ध्यर्थे मन्त्रजपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यास नारायणऋषये नमः (शिरसि) । अनुष्टुप् छन्दसे नमः (मुखे) । गिरिदुर्गादेवतायै नमः (हृदये) । हां बीजाय नमः (गुह्ये) । हीं शक्तये नमः (पादयोः) । क्लीं कीलकाय नमः (नाभौ) । विनियोगाय नमः (सर्वांगे) । कर-हृदयादिन्यास "हां हीं हूं हैं हौं हः" (इन छह बीजों से क्रमशः) । ध्यान गिरिराजकुमारिकां भवानीं शरणागतपालने च दक्षाम् । वरदाभयशङ्खचक्रहस्तां वरदात्रीं स्मरतां स्मरामि नित्यम् ॥ मूलमन्त्र "ॐ हीं" ।
बीज मंत्र
हांहींक्लीं
साधना विधि
स्रोत के अनुसार गिरिदुर्गा मन्त्रजप के लिए पहले विनियोग करना है। फिर ऋष्यादिन्यास और कर-हृदयादिन्यास करके ध्यान के बाद मूलमन्त्र का जप बताया गया है।
प्रयोग — कब और कहाँ
- गिरिदुर्गा मन्त्रजप
- श्रीगिरिदुर्गाप्रसादसिद्ध्यर्थ विनियोग
- ऋष्यादिन्यास
- कर-हृदयादिन्यास
- ध्यान और मूलमन्त्र जप
लाभ
- श्रीगिरिदुर्गाप्रसादसिद्धि
- गिरिदुर्गा मन्त्रजप
- ऋष्यादिन्यास
- कर-हृदयादिन्यास
- ध्यान
मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)
४. गिरिदुर्गा--अस्य श्रीगिरिदुर्गामन्त्रस्य नारायणऋषिः अनुष्टुप्छन्दः गिरिदुर्गादेवता हां बीजं हीं शक्तिः क्लीं कीलकं मम श्रीगिरिदुर्गाप्रसादसिद्ध्यर्थे मन्त्रजपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यास--नारायणऋषये नमः (शिरसि) । अनुष्टुप् छन्दसे नमः (मुखे) । गिरिदुर्गादेवतायै नमः (हृदये) । हां बीजाय नमः (गुह्ये) । हीं शक्तये नमः (पादयोः) । क्लीं कीलकाय नमः (नाभौ) । विनियोगाय नमः (सर्वांगे) । कर-हृदयादिन्यास--"हां हीं हूं हैं हौं हः" (इन छह बीजों से क्रमशः) । ध्यान--गिरिराजकुमारिकां भवानीं शरणागतपालने च दक्षाम् । वरदाभयशङ्खचक्रहस्तां वरदात्रीं स्मरतां स्मरामि नित्यम् ॥ मूलमन्त्र--"ॐ हीं" ।
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