प्लीहा रोग दूर करने में प्रयुक्त २५ अक्षरों का मन्त्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी
प्लीहा रोग नाशक हनुमान मंत्र और प्रयोग विधि -रुद्रयामल तंत्र
श्रीदेवता✦ श्रीहनुमान
हनुमान मंत्रप्लीहा रोग मंत्रहनुमान प्रयोग विधिरुद्रयामल तंत्र
तंत्र संदर्भ
स्रोत में शाबर मन्त्रों के समान हनुमान जी के मन्त्रों का उल्लेख करके यह २५ अक्षरों का मन्त्र प्लीहा रोग दूर करने में प्रयुक्त बताया गया है और इसके प्रयोग की विधि दी गई है।
मूल मंत्र
शाबर मन्त्रों के समान ही हनुमान जी के मन्त्र भी बहुत से प्राप्त होते हैं। उनमें से एक मन्त्र इस प्रकार है-- ६. ॐ यो यो हनूमन्त फलफलित धग्धगिति आयुरास परुडाह । यह २५ अक्षरों का मन्त्र प्लीहा रोग दूर करने में प्रयुक्त होता है। जिसको यह रोग हो उसके पेट पर पान का पत्ता रखें ओर उस पर आठ पर्तें लपेटा हुआ वस्त्र रखकर उसे ढक दें। फिर हनुमान जी का स्मरण करके उस पर बांस का एक टुकड़ा रखें। बाद में बेर की लकड़ी से बनी छड़ी लेकर उसे जंगली पत्थर से प्रकट की गई आग पर उक्त मन्त्र से सात बार तपायें, फिर उस छड़ी से पेट पर रखे हुए बांस के टुकड़े पर सात बार प्रहार करें। इससे ‘प्लीहा’ रोग नष्ट हो जाता है।
बीज मंत्र
ॐ
साधना विधि
जिसको यह रोग हो उसके पेट पर पान का पत्ता रखें ओर उस पर आठ पर्तें लपेटा हुआ वस्त्र रखकर उसे ढक दें। फिर हनुमान जी का स्मरण करके उस पर बांस का एक टुकड़ा रखें। बाद में बेर की लकड़ी से बनी छड़ी लेकर उसे जंगली पत्थर से प्रकट की गई आग पर उक्त मन्त्र से सात बार तपायें, फिर उस छड़ी से पेट पर रखे हुए बांस के टुकड़े पर सात बार प्रहार करें। इससे ‘प्लीहा’ रोग नष्ट हो जाता है।
प्रयोग — कब और कहाँ
- प्लीहा रोग दूर करने में प्रयुक्त मन्त्र
- पान का पत्ता और आठ पर्तें लपेटा हुआ वस्त्र
- बांस का टुकड़ा
- बेर की लकड़ी से बनी छड़ी
- सात बार तपाना
- सात बार प्रहार
लाभ
- इससे ‘प्लीहा’ रोग नष्ट हो जाता है।
मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)
शाबर मन्त्रों के समान ही हनुमान जी के मन्त्र भी बहुत से प्राप्त होते हैं। उनमें से एक मन्त्र इस प्रकार है-- ६. ॐ यो यो हनूमन्त फलफलित धग्धगिति आयुरास परुडाह । यह २५ अक्षरों का मन्त्र प्लीहा रोग दूर करने में प्रयुक्त होता है। जिसको यह रोग हो उसके पेट पर पान का पत्ता रखें ओर उस पर आठ पर्तें लपेटा हुआ वस्त्र रखकर उसे ढक दें। फिर हनुमान जी का स्मरण करके उस पर बांस का एक टुकड़ा रखें। बाद में बेर की लकड़ी से बनी छड़ी लेकर उसे जंगली पत्थर से प्रकट की गई आग पर उक्त मन्त्र से सात बार तपायें, फिर उस छड़ी से पेट पर रखे हुए बांस के टुकड़े पर सात बार प्रहार करें। इससे ‘प्लीहा’ रोग नष्ट हो जाता है।
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