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चण्डिका दुर्गा मंत्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी

माँ चण्डिका दुर्गा मंत्र विनियोग न्यास ध्यान और जप विधि -रुद्रयामल तंत्र

श्रीदेवताचण्डिकादुर्गा

दुर्गा साधनानौ दुर्गा मंत्रचण्डिका दुर्गा मंत्ररुद्रयामल तंत्र

तंत्र संदर्भ

स्रोत में '११. शान्तिदुर्गादि नौ दुर्गाओं के मन्त्र-विधान' के अंतर्गत '६. चण्डिका दुर्गा' में चण्डिका दुर्गा मन्त्र का विनियोग, ऋष्यादिन्यास, कर-हृदयादिन्यास, ध्यान और मूलमन्त्र दिया गया है।

मूल मंत्र

६. चण्डिका दुर्गा

विनियोग

अस्य श्रीचण्डिकादुर्गामन्त्रस्य दीर्घतमा ऋषिः ककुप् छन्दः चण्डिकादुर्गा देवता ॐ बीजं हीं शक्तिः धूं कीलकं मम श्रीचण्डिकादुर्गाप्रसादसिद्ध्यर्थे मन्त्रजपे विनियोगः ।

ऋष्यादिन्यास

दीर्घतमसे ऋषये नमः (शिरसि) । ककुप् छन्दसे नमः (मुखे) । चण्डिकादुर्गादेवतायै नमः (हृदये) । ॐ बीजाय नमः (गुह्ये) । हीं शक्तये नमः (पादयोः) । धूं कीलकाय नमः (नाभौ) । विनियोगाय नमः (सर्वाङ्गे) ।

कर-हृदयादिन्यास

"हां हीं हूं हैं हौं हः" (इन छह बीजों से क्रमशः) ।

ध्यान

शशलाञ्छनभूषितां त्रिनेत्रां वरदाभयशूलबाणहस्ताम् ।
धनुःखेटकधारिणीं महेशीं त्रिपुरारिवधूमहं भजामि ॥

मूलमन्त्र

"ॐ हीं ॐ धूं दुर्गायै स्वाहा।"

बीज मंत्र

हींधूं

साधना विधि

स्रोत के अनुसार चण्डिका दुर्गा मन्त्रजप के लिए पहले विनियोग करना है। फिर ऋष्यादिन्यास और कर-हृदयादिन्यास करके ध्यान के बाद मूलमन्त्र का जप बताया गया है।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • चण्डिका दुर्गा मन्त्रजप
  • श्रीचण्डिकादुर्गाप्रसादसिद्ध्यर्थ विनियोग
  • ऋष्यादिन्यास
  • कर-हृदयादिन्यास
  • ध्यान और मूलमन्त्र जप

लाभ

  • श्रीचण्डिकादुर्गाप्रसादसिद्धि
  • चण्डिका दुर्गा मन्त्रजप
  • ऋष्यादिन्यास
  • कर-हृदयादिन्यास
  • ध्यान

मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)

६. चण्डिका दुर्गा--अस्य श्रीचण्डिकादुर्गामन्त्रस्य दीर्घतमा ऋषिः ककुप् छन्दः चण्डिकादुर्गा देवता ॐ बीजं हीं शक्तिः धूं कीलकं मम श्रीचण्डिकादुर्गाप्रसादसिद्ध्यर्थे मन्त्रजपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यास--दीर्घतमसे ऋषये नमः (शिरसि) । ककुप् छन्दसे नमः (मुखे) । चण्डिकादुर्गादेवतायै नमः (हृदये) । ॐ बीजाय नमः (गुह्ये) । हीं शक्तये नमः (पादयोः) । धूं कीलकाय नमः (नाभौ) । विनियोगाय नमः (सर्वाङ्गे) । कर-हृदयादिन्यास--"हां हीं हूं हैं हौं हः" (इन छह बीजों से क्रमशः) । ध्यान--शशलाञ्छनभूषितां त्रिनेत्रां वरदाभयशूलबाणहस्ताम् । धनुःखेटकधारिणीं महेशीं त्रिपुरारिवधूमहं भजामि ॥ मूलमन्त्र--"ॐ हीं ॐ धूं दुर्गायै स्वाहा।"

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