पार्थिव शिवलिंग पूजा विधान और मंत्र -रुद्रयामल तंत्र
श्रीदेवता✦ श्रीसाम्बसदाशिव
तंत्र संदर्भ
रुद्रयामल में 'पार्थिव-पूजा' को सभी विद्याओं की साधना का अधिकार-प्राप्त करने का आधार माना है।
मूल मंत्र
इसके अनुसार शिव समस्त विद्याओं के अधिपति हैं और सब के गुरु हैं। आगमों की सृष्टि ही शिव और पार्वती के संवाद के रूप में हुई है। रुद्रयामल में 'पार्थिव-पूजा' को सभी विद्याओं की साधना का अधिकार-प्राप्त करने का आधार माना है। अतः यहाँ हम उसका पूजा-विधान प्रस्तुत कर रहे हैं— 'पार्थिव-पूजा' विधान संकल्प—'अद्येत्यादि' (पूरा संकल्प बोलकर) मम (अमुक) देवता पूजनाधिकारसिद्ध्यर्थं पार्थिवलिंगपूजनमहं करिष्ये। ऐसा संकल्प करके मृत्तिका के स्थान पर भूमि की प्रार्थना करे— ॐ सर्वाधारधरे देवि त्वद्रूपं मृत्तिकामिमाम्। ग्रहीष्यामि प्रसन्ना, त्वं लिङ्गार्थं भव सुप्रभे॥ इस प्रार्थना करके 'ॐ हराय नमः' बोलते हुए पवित्र स्थान से स्वच्छ मिट्टी ग्रहण करे। फिर 'ॐ महेश्वराय नमः' इस मन्त्र से उसे सांध ले। 'ॐ शूलपाणये नमः' बोलकर अपने सामने पीठ पर शिवलिंग बनाकर रखे। उसके बाद 'ॐ' मन्त्र से तीन प्राणायाम करे और पूजन के लिए विनियोग करे। विनियोग—अस्य श्रीसाम्बसदाशिव पूजन मन्त्रस्य वामदेव ऋषिः पंक्तिछन्दः श्री शिवो देवता ॐ बीजं नमः शक्तिः शिवाय कीलकं मम श्रीसाम्बसदाशिव प्रीत्यर्थ पूजने विनियोगः। ऋष्यादिन्यास—वामदेव ऋषये नमः (शिरसि), पंक्तिछन्दसे नमः (मुखे), श्रीशिवदेवतायै नमः (हृदये), ॐ बीजाय नमः (गुह्ये), नमः शक्तये नमः (पादयोः), शिवाय कीलकाय नमः (नाभौ), विनियोगाय नमः (सर्वाङ्गे)। कर-हृदयादिन्यास— ॐ ॐ अंगुष्ठाभ्यां नमः। ॐ नं तर्जनीभ्यां स्वाहा। ॐ मं मध्यमाभ्यां वषट्। ॐ शि अनामिकाभ्यां हुम्। ॐ वां कनिष्ठिकाभ्यां वौषट्। ॐ यं करतल करपृष्ठाभ्यां फट्। इसी प्रकार 'ॐ नं मं शि वां यं' अक्षरों से हृदयादि न्यास करे। ध्यान— शान्तं पद्मासनस्थं शशिधरमुकुटं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रं, शूलं वज्रं च खड्गं परशुमभयदं दक्षभागे वहन्तम्। नागं पाशं च घण्टां प्रलयहुतवहं साङ्कुशं वामभागे, नानालंकारदीप्तं स्फटिकमणिनिभं पार्वतीशं नमामि॥ इससे ध्यान करके मानस उपचारों से पूजन कर पात्रस्थापना करे। तत्पश्चात् चैतन्यमूर्तिकल्पना पुष्पांजलि द्वारा कर के 'ॐ पिनाकपाणे साम्ब इहागच्छागच्छ, इह तिष्ठ तिष्ठ संनिधत्स्व ममेष्टं साधय पूजां गृहाण हूं पिनाकपाणये नमः' इसके द्वारा आवाहन तथा प्राण-प्रतिष्ठा करे और इस स्तोत्र का पाठ करे— ॐ सर्वज्ञ ज्ञान-विज्ञान-प्रदानेक-महात्मने। नमस्ते देवदेवेश सर्वभूत-हिते रतं॥१॥ अनन्तकीर्ति-सम्पन्न अनेकासन-संस्थित। अनेककान्ति-संयोग परमेश नमोऽस्तु ते॥२॥ परात्पर मदातीत उत्पत्ति-स्थिति-कारक। सर्वार्थसाधनोपाय विश्वेश्वर नमोऽस्तु ते॥३॥ स्वभाव-निर्मलाभोग सर्वव्याधि-विनाशन। योगि-योगि-महायोगि-योगीश्वर नमोऽस्तुते॥४॥ यह स्तोत्र पढ़कर शिवजी को प्रणाम करे तथा 'ॐ नमः शिवाय' इस मन्त्र से प्रतिष्ठापित लिंग की स्नानादि-पूजा करे। तदनन्तर पीठ पर अपने सामने से अष्टमूर्ति शिव की गन्धाक्षत द्वारा नीचे बताये मन्त्रों को बोलते हुए पूजा करे— १. ॐ शर्वाय क्षितिमूर्तये नमः। २. ॐ भवाय जलमूर्तये नमः। ३. ॐ रुद्रायाग्निमूर्तये नमः। ४. ॐ उग्राय वायुमूर्तये नमः। ५. ॐ भीमायाकाशमूर्तये नमः। ६. ॐ पशुपतये यजमानमूर्तये नमः। ७. ॐ महादेवाय सोममूर्तये नमः। ॐ ईशानाय सूर्याय नमः और प्रणालिका में 'श्री उमायै नमः' से पार्वती की पूजा करे। इसके अनन्तर 'सांगाय सपरिवाराय श्रीशिवाय नमः' कहकर तीन बार शिवलिंग पर गन्धाक्षत चढ़ाये तथा 'ॐ नमः शिवाय' मन्त्र से धूप, दीप, नैवेद्य कर आरती और पुष्पांजलि करे। प्राणायाम और ऋष्यादि-षडंग-न्यास-पूर्वक जप करे तथा क्षमा प्रार्थना करे— अंगहीनं क्रियाहीनं विधिहीनं महेश्वर। पूजितोऽसि महादेव तत्क्षमस्व ममाङृतम्॥ अयं दानकालस्त्वहूं दानपात्रं, भवान् नाथ दाता त्वदन्यं न याचे। भवद्भक्तिमन्तःस्थिरां देहि मह्यं, कृपाशील शम्भो कृतार्थोऽस्मि तस्मात्॥ तथा अर्घ्य स्तोत्रादि को पाठ करे। पार्थिवेश्वर का उद्धासन करे।
बीज मंत्र
विनियोग
अस्य श्रीसाम्बसदाशिव पूजन मन्त्रस्य वामदेव ऋषिः पंक्तिछन्दः श्री शिवो देवता ॐ बीजं नमः शक्तिः शिवाय कीलकं मम श्रीसाम्बसदाशिव प्रीत्यर्थ पूजने विनियोगः।
न्यास
ऋष्यादिन्यास और कर-हृदयादिन्यास सहित 'ॐ नं मं शि वां यं' अक्षरों से हृदयादि न्यास करने का विधान दिया गया है।
ध्यान
शान्तं पद्मासनस्थं शशिधरमुकुटं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रं, शूलं वज्रं च खड्गं परशुमभयदं दक्षभागे वहन्तम्। नागं पाशं च घण्टां प्रलयहुतवहं साङ्कुशं वामभागे, नानालंकारदीप्तं स्फटिकमणिनिभं पार्वतीशं नमामि॥
साधना विधि
संकल्प, भूमि-प्रार्थना, मृत्तिका-ग्रहण, शिवलिंग-निर्माण, प्राणायाम, विनियोग, ऋष्यादि-न्यास, कर-हृदयादि-न्यास, ध्यान, पात्रस्थापना, आवाहन-प्राणप्रतिष्ठा, स्तोत्र-पाठ, अष्टमूर्ति-पूजा, पार्वती-पूजा, धूप-दीप-नैवेद्य, आरती, पुष्पांजलि, जप, क्षमा-प्रार्थना, दान-प्रार्थना और पार्थिवेश्वर उद्धासन का विधान दिया गया है।
स्तोत्र
ॐ सर्वज्ञ ज्ञान-विज्ञान-प्रदानेक-महात्मने। नमस्ते देवदेवेश सर्वभूत-हिते रतं॥१॥ अनन्तकीर्ति-सम्पन्न अनेकासन-संस्थित। अनेककान्ति-संयोग परमेश नमोऽस्तु ते॥२॥ परात्पर मदातीत उत्पत्ति-स्थिति-कारक। सर्वार्थसाधनोपाय विश्वेश्वर नमोऽस्तु ते॥३॥ स्वभाव-निर्मलाभोग सर्वव्याधि-विनाशन। योगि-योगि-महायोगि-योगीश्वर नमोऽस्तुते॥४॥
पूजा मंत्र
ॐ हराय नमः,ॐ महेश्वराय नमः,ॐ शूलपाणये नमः,ॐ पिनाकपाणे साम्ब इहागच्छागच्छ, इह तिष्ठ तिष्ठ संनिधत्स्व ममेष्टं साधय पूजां गृहाण हूं पिनाकपाणये नमः,ॐ नमः शिवाय,ॐ शर्वाय क्षितिमूर्तये नमः,ॐ भवाय जलमूर्तये नमः,ॐ रुद्रायाग्निमूर्तये नमः,ॐ उग्राय वायुमूर्तये नमः,ॐ भीमायाकाशमूर्तये नमः,ॐ पशुपतये यजमानमूर्तये नमः,ॐ महादेवाय सोममूर्तये नमः,ॐ ईशानाय सूर्याय नमः,श्री उमायै नमः,सांगाय सपरिवाराय श्रीशिवाय नमः
प्रयोग — कब और कहाँ
- पार्थिव-पूजा
- पार्थिव शिवलिंग पूजा
- देवता पूजनाधिकार सिद्धि
- श्रीसाम्बसदाशिव पूजन
- अष्टमूर्ति शिव पूजा
लाभ
- सभी विद्याओं की साधना का अधिकार-प्राप्त करने का आधार
- देवता पूजनाधिकार सिद्धि
- श्रीसाम्बसदाशिव प्रीति