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कुमारी पूजा-मन्त्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी

कुमारी पूजन पूजा मंत्र और नवदुर्गा पूजन विधि -रुद्रयामल तंत्र

श्रीदेवताकुमारिका / नवदुर्गा

कुमारी पूजननवदुर्गा पूजनशक्ति साधनारुद्रयामल तंत्र

तंत्र संदर्भ

स्रोत में '(ङ) कुमारी-पूजन-प्रयोग' के अंतर्गत आवाहन-मन्त्र के बाद पूजा-मन्त्र और नवरात्र अथवा दशरात्र पूजा का विधान दिया गया है।

मूल मंत्र

पूजा-मन्त्र--प्रत्येक दिन की कुमारिका के चतुर्थी विभक्त्यन्त नाम के पहले 'ऐं ह्रीं श्रीं हूं हसौः' इन बीजों को तथा अन्त में 'नमः' लगाये।

यदि नवरात्र अथवा दशरात्र की पूजा करनी हो तो उसके लिए 'प्रथमं शैलपुत्रीति द्वितीयं ब्रह्मचारिणी' के क्रम से पूजा करे तथा 'ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः' के मन्त्रों से पूजा सामग्री अर्पित करे।

बीज मंत्र

ऐंह्रींश्रींहूंहसौःक्लीं

साधना विधि

प्रत्येक दिन की कुमारिका के चतुर्थी विभक्त्यन्त नाम के पहले 'ऐं ह्रीं श्रीं हूं हसौः' इन बीजों को तथा अन्त में 'नमः' लगाये। यदि नवरात्र अथवा दशरात्र की पूजा करनी हो तो 'प्रथमं शैलपुत्रीति द्वितीयं ब्रह्मचारिणी' के क्रम से पूजा करे तथा 'ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः' के मन्त्रों से पूजा सामग्री अर्पित करे।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • कुमारी पूजन
  • पूजा-मन्त्र प्रयोग
  • नवरात्र पूजा
  • दशरात्र पूजा
  • पूजा सामग्री अर्पण

लाभ

  • कुमारी के नाम से पूजा-मन्त्र लगाने का विधान
  • नवरात्र अथवा दशरात्र पूजा का क्रम
  • पूजा सामग्री अर्पण का मन्त्र-विधान

मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)

पूजा-मन्त्र--प्रत्येक दिन की कुमारिका के चतुर्थी विभक्त्यन्त नाम के पहले 'ऐं ह्रीं श्रीं हूं हसौः' इन बीजों को तथा अन्त में 'नमः' लगाये। यदि नवरात्र अथवा दशरात्र की पूजा करनी हो तो उसके लिए 'प्रथमं शैलपुत्रीति द्वितीयं ब्रह्मचारिणी' के क्रम से पूजा करे तथा 'ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः' के मन्त्रों से पूजा सामग्री अर्पित करे।

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