कुमारी आवाहन मन्त्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी
कुमारी पूजन आवाहन मंत्र और निमंत्रण विधि -रुद्रयामल तंत्र
श्रीदेवता✦ भगवती कुमारिका
कुमारी पूजनदेवी आवाहन मंत्रशक्ति साधनारुद्रयामल तंत्र
तंत्र संदर्भ
स्रोत में '(ङ) कुमारी-पूजन-प्रयोग' के अंतर्गत पूजा-विधान में कुमारिका निमंत्रण, पूजन-विधि और आवाहन-मन्त्र दिया गया है।
मूल मंत्र
आवाहन-मन्त्र--मन्त्राक्षरमयीं लक्ष्मीं मातृकारूपधारिणीम्। नवदुर्गात्मिकां साक्षात् कन्यामावाहयाम्यहम्॥
साधना विधि
पूजा के दिन से एक दिन पूर्व कुमारिका के घर जाकर मूलमन्त्र-स्मरणपूर्वक नारिकेल और सुपारी अर्पित कर निमंत्रण-प्रार्थना करने का विधान है। दूसरे दिन नित्यपूजा के पश्चात् कन्या को आसन पर बिठाकर चरण प्रक्षालित करे, पूजागृह में उत्तम पीठ पर पश्चिमाभिमुख बिठाए, कुमारीपूजन का संकल्प करे, गुरु और गणपति वन्दनपूर्वक मूल विद्या से तीन प्राणायाम करे और पीठपूजापूर्वक कुमारिका में देवी का आवाहन करे।
प्रयोग — कब और कहाँ
- कुमारी पूजन आवाहन
- कुमारिका निमंत्रण
- पूजा-विधान
- मूलमन्त्र-स्मरणपूर्वक निमंत्रण
- देवी आवाहन
लाभ
- कुमारीपूजन का संकल्प
- कुमारिका में देवी का आवाहन
- पूजा-विधान का स्रोत-वर्णन
- कृतार्थता की निमंत्रण-प्रार्थना
मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)
२. पूजा-विधान--साधक नित्यक्रिया से निवृत्त होकर पूजा के दिन से एक दिन पूर्व कुमारिका के घर जाए। वहां मूलमन्त्र-स्मरणपूर्वक नारिकेल और सुपारी अर्पित करे और प्रार्थना करे कि "भगवती कुमारिका ! मैं आपको पूजन के लिए निमन्त्रित करता हूं। आप पधारकर कृतार्थ करें।" दूसरे दिन नित्यपूजा के पश्चात् पूजागृह से अन्यत्र आसन पर कन्या को बिठाकर उसके चरण प्रक्षालित करे। तब पूजागृह में लाकर उत्तम पीठ पर पश्चिमाभिमुख बिठाए। उसके सम्मुख स्वयं अपने आसन पर बैठकर कुमारीपूजन का संकल्प करे। गुरु और गणपति वन्दनपूर्वक मूल विद्या से तीन प्राणायाम करें और पीठपूजापूर्वक कुमारिका में देवी का आवाहन, ध्यान, पूजन आदि करके भोजन कराए। जब तक वह भोजन करे तब तक अपने इष्टमन्त्र का जप करे। भोजन कर लेने पर हस्तप्रक्षालनादि कराए और ताम्बूल समर्पित कर आरती उतारे तथा यथाशक्ति वस्त्र, अलंकार दक्षिणा आदि भेंट करे और प्रणाम करके विसर्जित करे। १. आवाहन-मन्त्र है--"मन्त्राक्षरमयीं लक्ष्मीं मातृकारूपधारिणीम्। नवदुर्गात्मिकां साक्षात् कन्यामावाहयाम्यहम्॥"
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