ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
स्तोत्ररुद्रयामल तंत्रसंस्कृत + हिन्दी

गुरु-कृपा प्राप्ति स्तोत्र

श्रीदेवतागुरु

श्री गुरु उपासनागुरु-कृपारुद्रयामल

मूल मंत्र

नमस्ते नाथ भगवन्‌ ! शिवाय गुरुरूपिणे।
विद्यावतारसंसिद्धये स्वीकृतानेक-विग्रह ॥१॥

नवाय नवरूपाय परमार्थैक रूपिणे।
सर्वाज्ञान-तमोभेदभानवे चिद्धनाय ते ॥२॥

स्वतन्त्राय दयाक्लृप्त-विग्रहाय परात्मने।
परतन्त्राय भक्तानां भव्यानां भव्यरूपिणे ॥३॥

विवेकिनां विवेकाय विमर्शाय विमर्शिणाम्‌।
प्रकाशिनां प्रकाशाय ज्ञानिनां ज्ञानरूपिणे ॥४॥

पुरस्तात्‌ पार्श्वयोः पृष्ठे नमस्कुर्यामुपर्यधः।
सदा मच्चित्तरूपेण विधेहि भवदासनम्‌ ॥५॥

साधना विधि

गुरुकृपा प्राप्त करने के लिये गुरु का हृदय में निवास तथा विवेक, विमर्श और प्रकाश की नितान्त आवश्यकता है। अतः निम्नलिखित स्तोत्र का पाठ भी करना चाहिए।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • गुरुकृपा प्राप्त करने के लिये