नामोपासना / नाम-स्मरणरुद्रयामल तंत्रसंस्कृत + हिन्दी
गणपति के 12 नाम मंत्र और 16 नाम स्मरण रुद्रयामल तंत्र से
श्रीदेवता✦ गणपति
महागणपति-साधना और रुद्रयामलनामोपासना के प्रकारगणपति नाम स्मरण
तंत्र संदर्भ
शास्त्रकारों ने 'गणपति' शब्द की व्युत्पत्ति करते हुए इसका अर्थ बतलाया है कि 'ग' का अर्थ है जीवात्मा, 'ण' का अर्थ है मुक्तिदशा में ले जाना तथा पतिः का अर्थ है आदि और अन्त से रहित परमात्मदशा में लीन होने का अनुग्रह करना। इस प्रकार 'गणपति' जीवात्मा को मुक्तिदशा में ले जाकर उसे आदि और अन्त से रहित परमात्मदशा में लीन होने तक की कृपा करने वाले देव हैं। यही कारण है कि गणपति की नामोपासना के भी अनेक प्रकार रुद्रयामल में तथा आगमों में दिये गये हैं। सरल से सरल प्रयोग भी इसमें मिलते हैं और कठिनातिकठिन भी। जिसमें जैसी शक्ति और भक्ति हो वैसा करे, किन्तु करे अवश्य।
मूल मंत्र
(क) विघ्न-विनायक के १६ नामों का स्मरण इस प्रकार है-- १. बालविघ्नेशाय नमः; २. तरुणाय नमः; ३. भक्तविघ्नेशाय नमः; ४. वीरविघ्नकाय नमः; ५. शक्तिविघ्नेशाय नमः; ६. द्विजगणाधिपाय नमः; ७. सिद्धिऋद्धीशाय नमः; ८. उच्छिष्टाय नमः; ९. विघ्नराजाय नमः; १०. क्षिप्रनायकाय नमः; ११. हेरम्बाय नमः; १२. लक्ष्मीनायकाय नमः; १३. महाविघ्नाय नमः; १४. विजयाय नमः; १५. नृत्ताय नमः; १६. ऊर्ध्वनायकाय नमः। (ख) गणपति के १२ नामों का स्मरण तो प्रसिद्ध है ही। यथा-- सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः। लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः॥ धूमकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः।
साधना विधि
इन बारह नामों का पठन और श्रवण दोनों ही लाभप्रद हैं। इनसे विघ्नों का निवारण होता है अतः सभी मांगलिक कार्यों के आरम्भ में तथा यात्रा में आने-जाने के समय स्मरण करना चाहिए।
प्रयोग — कब और कहाँ
- नामोपासना
- विघ्नों का निवारण
- मांगलिक कार्यों के आरम्भ में स्मरण
- यात्रा में स्मरण
लाभ
- विघ्नों का निवारण होता है
- मांगलिक कार्यों के आरम्भ में स्मरण योग्य
- यात्रा में आने-जाने के समय स्मरण योग्य