बारह अक्षरों वाला महामन्त्रराजरुद्रयामल तंत्रहिन्दी
हनुमान बारह अक्षरी महामन्त्रराज जप विधि -रुद्रयामल तंत्र
श्रीदेवता✦ श्रीहनुमान्
हनुमान मंत्रबारह अक्षरी मंत्रमहामन्त्रराजहनुमान साधनारुद्रयामल तंत्र
तंत्र संदर्भ
स्रोत में यह मन्त्र बारह अक्षरों वाला महामन्त्रराज कहा गया है। इसी के साथ विनियोग, ऋष्यादि न्यास, करन्यास, षडंगन्यास, द्वादशांग न्यास, अष्टांग न्यास, ध्यान, १२ हजार जप, दशांश हवन और प्रयोग श्लोक दिया गया है।
मूल मंत्र
(१) हौं ह्स्फ्रें ख्फ्रें हसौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं हनुमते नमः। यह बारह अक्षरों वाला महामन्त्रराज है। इसके विनियोगादि इस प्रकार हैं-- विनियोग--अस्य श्रीहनुमन्महामन्त्रराजस्य श्रीरामचन्द्र ऋषिः, जगतीच्छन्दः, श्रीहनुमान्, देवता, हसौं बीजं, हस्फ्रें शक्तिः श्रीहनुमत्- प्रसादसिद्धये जपे विनियोगः। ऋष्यादि न्यास--श्रीरामचन्द्र ऋषये नमः (शिरसि)। जगती- च्छन्दसे नमः (मुखे)। श्रीहनुमद्देवतायै नमः (हृदये)। हसौं बीजाय नमः (गुह्ये)। हस्फ्रें शक्तये नमः (पादयोः)। (इसमें कीलक नहीं है)। विनियोगाय नमः (सर्वांगे)। मन्त्रोक्त छः बीजों से करन्यास एवं षडंगन्यास करें। पूरे मन्त्र के एक-एक अक्षर से--'१. मस्तके, २. ललाटे, ३. नेत्रयोः, ४. मुखे, ५. कण्ठे, ६. बाह्वोः, ७. हृदये, ८. कुक्ष्योः, ९. नाभौ, १०. लिंगे, ११. जान्वोः १२. चरणयोः' बोलते हुए द्वादशांग न्यास करें। इसी प्रकार छः बीज और दो पदों से--'१. मस्तके, २. ललाटे, ३. मुखे, ४. हृदये, ५. नाभौ, ६. ऊर्वोः, ७. जङ्घयोः, ८. चरणयोः' बोलते हुए अष्टांग न्यास करें। ध्यान--उद्यत्कोट्यर्कसङ्काशं जगत्क्षोभकारकम्। श्रीरामाङ्घ्रिध्याननिष्ठं, सुग्रीवप्रमुखार्चितम्॥ महाबलसमायुक्तं भक्तभीति-निवारकम्। वित्रासयन्तं नादेन राक्षसान् मारुतिं भजे॥ इस प्रकार ध्यान करके मन्त्र का १२ हजार जप करें। फिर दही, दूध और घी मिले हुए धान से दशांश हवन करें। इस विधान में हनुमद्मन्त्र और उसकी विस्तृत पूजा का भी विधान है; किन्तु उसे विस्तार भय से नहीं दे रहे हैं। इच्छुकजन गुरुजनों से ज्ञान प्राप्त करें। यह प्रयोग-- विद्यां वापि धनं वापि राज्यं वा शत्रुविग्रहम्। तत्क्षणादेव जानोति सत्यं सत्यं मुनिश्वरम्॥
बीज मंत्र
हौंह्स्फ्रेंख्फ्रेंहसौंह्स्ख्फ्रेंह्सौं
साधना विधि
मन्त्रोक्त छः बीजों से करन्यास एवं षडंगन्यास करें। पूरे मन्त्र के एक-एक अक्षर से द्वादशांग न्यास करें। इसी प्रकार छः बीज और दो पदों से अष्टांग न्यास करें। ध्यान करके मन्त्र का १२ हजार जप करें। फिर दही, दूध और घी मिले हुए धान से दशांश हवन करें।
प्रयोग — कब और कहाँ
- हनुमान बारह अक्षरी महामन्त्रराज
- विनियोग
- ऋष्यादि न्यास
- करन्यास
- षडंगन्यास
- द्वादशांग न्यास
- अष्टांग न्यास
- ध्यान
- १२ हजार जप
- दशांश हवन
- विद्या धन राज्य शत्रुविग्रह प्रयोग
लाभ
- विद्यां वापि धनं वापि राज्यं वा शत्रुविग्रहम्।
- तत्क्षणादेव जानोति सत्यं सत्यं मुनिश्वरम्॥
मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)
(१) हौं ह्स्फ्रें ख्फ्रें हसौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं हनुमते नमः। यह बारह अक्षरों वाला महामन्त्रराज है। इसके विनियोगादि इस प्रकार हैं-- विनियोग--अस्य श्रीहनुमन्महामन्त्रराजस्य श्रीरामचन्द्र ऋषिः, जगतीच्छन्दः, श्रीहनुमान्, देवता, हसौं बीजं, हस्फ्रें शक्तिः श्रीहनुमत्- प्रसादसिद्धये जपे विनियोगः। ऋष्यादि न्यास--श्रीरामचन्द्र ऋषये नमः (शिरसि)। जगती- च्छन्दसे नमः (मुखे)। श्रीहनुमद्देवतायै नमः (हृदये)। हसौं बीजाय नमः (गुह्ये)। हस्फ्रें शक्तये नमः (पादयोः)। (इसमें कीलक नहीं है)। विनियोगाय नमः (सर्वांगे)। मन्त्रोक्त छः बीजों से करन्यास एवं षडंगन्यास करें। पूरे मन्त्र के एक-एक अक्षर से--'१. मस्तके, २. ललाटे, ३. नेत्रयोः, ४. मुखे, ५. कण्ठे, ६. बाह्वोः, ७. हृदये, ८. कुक्ष्योः, ९. नाभौ, १०. लिंगे, ११. जान्वोः १२. चरणयोः' बोलते हुए द्वादशांग न्यास करें। इसी प्रकार छः बीज और दो पदों से--'१. मस्तके, २. ललाटे, ३. मुखे, ४. हृदये, ५. नाभौ, ६. ऊर्वोः, ७. जङ्घयोः, ८. चरणयोः' बोलते हुए अष्टांग न्यास करें। ध्यान--उद्यत्कोट्यर्कसङ्काशं जगत्क्षोभकारकम्। श्रीरामाङ्घ्रिध्याननिष्ठं, सुग्रीवप्रमुखार्चितम्॥ महाबलसमायुक्तं भक्तभीति-निवारकम्। वित्रासयन्तं नादेन राक्षसान् मारुतिं भजे॥ इस प्रकार ध्यान करके मन्त्र का १२ हजार जप करें। फिर दही, दूध और घी मिले हुए धान से दशांश हवन करें। इस विधान में हनुमद्मन्त्र और उसकी विस्तृत पूजा का भी विधान है; किन्तु उसे विस्तार भय से नहीं दे रहे हैं। इच्छुकजन गुरुजनों से ज्ञान प्राप्त करें। यह प्रयोग-- विद्यां वापि धनं वापि राज्यं वा शत्रुविग्रहम्। तत्क्षणादेव जानोति सत्यं सत्यं मुनिश्वरम्॥
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