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लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न मन्त्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी

लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न मंत्र और ध्यान विधि -रुद्रयामल तंत्र

श्रीदेवतालक्ष्मणादि देवता

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तंत्र संदर्भ

स्रोत में लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के तीन मन्त्र एक साथ दिए गए हैं और इनके लिए अगस्त्य ऋषि, गायत्री छन्द, लक्ष्मणादि देवता, लं बीज तथा नमः शक्ति बताई गई है। कर न्यास, हृदयादि न्यास और समान ध्यान पद्य भी इसी समूह के लिए दिया गया है।

मूल मंत्र

लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के मन्त्र

(१) ॐ लं लक्ष्मणाय नमः। (२) ॐ भं भरताय नमः। (३) ॐ शं
शत्रुघ्नाय नमः।

इन मन्त्रों के अगस्त्य ऋषि, गायत्री छन्द तथा लक्ष्मणादि देवता
लं बीज और नमः शक्ति हैं। इनके अनुसार विनियोग और ऋष्यादि
न्यास बना लें। कर न्यास और हृदयादि न्यास मूल मन्त्रों से करें।
ध्यान के लिए निम्नलिखित पद्य सभी के लिए समान है--

द्विभुजं स्वर्णरचिततनुं पद्मनिभेक्षणम्।
धनुर्बाणकरं रामसेवा-संसक्तमानसम्॥

इनके अतिरिक्त इनके स्तोत्र, कवच, शतनाम, सहस्रनाम आदि
भी प्राप्त होते हैं जिनका गुरुप्रदत्त उपदेश के अनुसार स्मरण-अर्चन
करना चाहिए।

बीज मंत्र

लंभंशं

साधना विधि

स्रोत में इन मन्त्रों के लिए अगस्त्य ऋषि, गायत्री छन्द, लक्ष्मणादि देवता, लं बीज और नमः शक्ति बताई गई है। इनके अनुसार विनियोग और ऋष्यादि न्यास बनाने तथा कर न्यास और हृदयादि न्यास मूल मन्त्रों से करने का निर्देश है। ध्यान के लिए समान पद्य दिया गया है।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • लक्ष्मण मन्त्र
  • भरत मन्त्र
  • शत्रुघ्न मन्त्र
  • ऋष्यादि न्यास
  • कर न्यास
  • हृदयादि न्यास
  • ध्यान

लाभ

  • स्रोत में विनियोग और ऋष्यादि न्यास बनाने का निर्देश दिया गया
  • समान ध्यान पद्य दिया गया
  • स्तोत्र, कवच, शतनाम, सहस्रनाम आदि का उल्लेख है

मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)

लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के मन्त्र (१) ॐ लं लक्ष्मणाय नमः। (२) ॐ भं भरताय नमः। (३) ॐ शं शत्रुघ्नाय नमः। इन मन्त्रों के अगस्त्य ऋषि, गायत्री छन्द तथा लक्ष्मणादि देवता लं बीज और नमः शक्ति हैं। इनके अनुसार विनियोग और ऋष्यादि न्यास बना लें। कर न्यास और हृदयादि न्यास मूल मन्त्रों से करें। ध्यान के लिए निम्नलिखित पद्य सभी के लिए समान है-- द्विभुजं स्वर्णरचिततनुं पद्मनिभेक्षणम्। धनुर्बाणकरं रामसेवा-संसक्तमानसम्॥ इनके अतिरिक्त इनके स्तोत्र, कवच, शतनाम, सहस्रनाम आदि भी प्राप्त होते हैं जिनका गुरुप्रदत्त उपदेश के अनुसार स्मरण-अर्चन करना चाहिए।

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