लक्ष्मी बारह नाम नामावली मंत्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी
माँ लक्ष्मी बारह नाम नामावली पूजा विधान -रुद्रयामल तंत्र
श्रीदेवता✦ लक्ष्मीदेवी
लक्ष्मी साधनाकमला साधनानामावली-विधानसम्पत्ति साधनारुद्रयामल तंत्र
तंत्र संदर्भ
स्रोत में '१०. महाविद्या श्रीकमला की उपासना' के अंतर्गत '(ग) नामावली-विधान' में लक्ष्मीदेवी की पूजा, प्रार्थना और बारह नामों की नामावली दी गयी है।
मूल मंत्र
(ग) नामावली-विधान त्रैलोक्यपूजिते देवि, कमले विष्णुवल्लभे । यथा त्वमचला कृष्णे, तथा भव मयि स्थिरा ॥ ॐ श्रीं ईश्वर्यै नमः। ॐ श्रीं कमलायै नमः। ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः। ॐ श्रीं चलायै नमः। ॐ श्रीं भूत्यै नमः। ॐ श्रीं हरिप्रियायै नमः। ॐ श्रीं पद्मायै नमः। ॐ श्रीं पद्मालयायै नमः। ॐ श्रीं सम्पत्त्यै नमः। ॐ श्रीं उच्चैः नमः। ॐ श्रीं श्रियै नमः। ॐ श्रीं पद्मधारिण्यै नमः॥ द्वादशैतानि नामानि लक्ष्मीं सम्पूज्य यः पठेत् । स्थिरा लक्ष्मीर्भवेत् तस्य पुत्रदारादिभिः सह ॥
बीज मंत्र
ॐश्रीं
साधना विधि
स्रोत के अनुसार चांदी अथवा पीतल की थाली में कुंकुम, केशर, चन्दन, सिन्दूर अथवा हल्दी से षट्कोण, अष्टदल और एकरेखात्मक चतुरद्वारयुक्त भूपुर बनाकर उसमें लक्ष्मीदेवी का आह्वान करना है। गन्धाक्षत-पुष्पादि से पूजन और प्रार्थना के बाद बारह नामों से पूजा करनी है। पूजा में सुगन्धित पुष्प, केसर से रंगे अक्षत, हरिद्रा अथवा कुंकुम का प्रयोग बताया गया है। अंत में धूप, दीप, नैवेद्य करके विसर्जन करना है।
प्रयोग — कब और कहाँ
- लक्ष्मी पूजा
- बारह नामों से पूजा
- स्थिर लक्ष्मी प्राप्ति
- सुख-सम्पत्ति प्राप्ति
- नामावली-विधान
लाभ
- सर्वविधि सुख प्राप्ति
- सम्पत्ति प्राप्ति
- स्थिर लक्ष्मी प्राप्ति
- लक्ष्मी पूजा
मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)
रुद्रयामल में एक अत्यन्त लघु स्तोत्र भी दिया है, जिसका विधान इस प्रकार है-- कुंकुम से किसी चांदी अथवा पीतल की थाली में कुंकुम, केशर, चन्दन, सिन्दूर अथवा हल्दी से षट्कोण, अष्टदल और एकरेखात्मक चतुरद्वारयुक्त भूपुर बनाएं। उसमें लक्ष्मीदेवी का आह्वान करके गन्धाक्षत-पुष्पादि से पूजन करें और प्रार्थना करें-- त्रैलोक्यपूजिते देवि, कमले विष्णुवल्लभे । यथा त्वमचला कृष्णे, तथा भव मयि स्थिरा ॥ और इसके पश्चात् नीचे बताये हुए बारह नामों से लक्ष्मी की पूजा करें। पूजा में सुगन्धित पुष्प, केसर से रंगे हुए अक्षत, हरिद्रा अथवा कुंकुम का प्रयोग करें। नामावलि इस प्रकार हैं-- (ग) नामावली-विधान ॐ श्रीं ईश्वर्यै नमः। ॐ श्रीं कमलायै नमः। ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः। ॐ श्रीं चलायै नमः। ॐ श्रीं भूत्यै नमः। ॐ श्रीं हरिप्रियायै नमः। ॐ श्रीं पद्मायै नमः। ॐ श्रीं पद्मालयायै नमः। ॐ श्रीं सम्पत्त्यै नमः। ॐ श्रीं उच्चैः नमः। ॐ श्रीं श्रियै नमः। ॐ श्रीं पद्मधारिण्यै नमः॥ इनसे पूजा करके धूप, दीप, नैवेद्य करके विसर्जन करें। इससे सर्वविधि, सुख, सम्पत्ति एवं स्थिर लक्ष्मी प्राप्त होती है। पद्मपुराण में कहा गया है कि-- द्वादशैतानि नामानि लक्ष्मीं सम्पूज्य यः पठेत् । स्थिरा लक्ष्मीर्भवेत् तस्य पुत्रदारादिभिः सह ॥
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