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महिषमर्दिनी दुर्गा मंत्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी

माँ महिषमर्दिनी दुर्गा मंत्र विनियोग न्यास ध्यान और जप विधि -रुद्रयामल तंत्र

श्रीदेवतामहिषमर्दिनी दुर्गा

दुर्गा साधनानौ दुर्गा मंत्रमहिषमर्दिनी दुर्गा मंत्ररुद्रयामल तंत्र

तंत्र संदर्भ

स्रोत में '११. शान्तिदुर्गादि नौ दुर्गाओं के मन्त्र-विधान' के अंतर्गत '७. महिषमर्दिनी दुर्गा' में महिषमर्दिनी दुर्गा मन्त्र का विनियोग, ऋष्यादिन्यास, कर-हृदयादिन्यास, ध्यान और मूलमन्त्र दिया गया है।

मूल मंत्र

७. महिषमर्दिनी दुर्गा

विनियोग

अस्य श्रीमहिषमर्दिनी दुर्गामन्त्रस्य ककुप् छन्दः महिषमर्दिनीदेवता ॐ बीजं महिषमर्दिनीशक्तिः स्वाहा कीलकं मम श्रीमहिषमर्दिनी दुर्गाप्रसादसिद्ध्यर्थे मन्त्रजपे विनियोगः ।

ऋष्यादिन्यास

दीर्घतमसे ऋषये नमः (शिरसि) । ककुप् छन्दसे नमः (मुखे) । महिषमर्दिनीदुर्गादेवतायै नमः (हृदये) । ॐ बीजाय नमः (गुह्ये) । महिषमर्दिन्यै शक्तये नमः (पादयोः) । स्वाहा कीलकाय नमः (नाभौ) । विनियोगाय नमः (सर्वाङ्गे) ।

कर-हृदयादिन्यास

"महिषसिंहे हुं फट् ।" (इस मन्त्र से करे ।)

ध्यान

अष्टो भुजाढ्यां महिषस्य मर्दिनीं सशंखचक्रां शरचापधारिणीम् ।
तां सूर्यकोटिप्रतिमां ललस्थितां दुर्गां सदा तां शरणं व्रजाम्यहम् ॥

मूलमन्त्र

"ॐ महिषमर्दिनि स्वाहा ।"

बीज मंत्र

महिषमर्दिनीस्वाहा

साधना विधि

स्रोत के अनुसार महिषमर्दिनी दुर्गा मन्त्रजप के लिए पहले विनियोग करना है। फिर ऋष्यादिन्यास और कर-हृदयादिन्यास करके ध्यान के बाद मूलमन्त्र का जप बताया गया है।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • महिषमर्दिनी दुर्गा मन्त्रजप
  • श्रीमहिषमर्दिनी दुर्गाप्रसादसिद्ध्यर्थ विनियोग
  • ऋष्यादिन्यास
  • कर-हृदयादिन्यास
  • ध्यान और मूलमन्त्र जप

लाभ

  • श्रीमहिषमर्दिनी दुर्गाप्रसादसिद्धि
  • महिषमर्दिनी दुर्गा मन्त्रजप
  • ऋष्यादिन्यास
  • कर-हृदयादिन्यास
  • ध्यान

मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)

७. महिषमर्दिनी दुर्गा--अस्य श्रीमहिषमर्दिनी दुर्गामन्त्रस्य ककुप् छन्दः महिषमर्दिनीदेवता ॐ बीजं महिषमर्दिनीशक्तिः स्वाहा कीलकं मम श्रीमहिषमर्दिनी दुर्गाप्रसादसिद्ध्यर्थे मन्त्रजपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यास--दीर्घतमसे ऋषये नमः (शिरसि) । ककुप् छन्दसे नमः (मुखे) । महिषमर्दिनीदुर्गादेवतायै नमः (हृदये) । ॐ बीजाय नमः (गुह्ये) । महिषमर्दिन्यै शक्तये नमः (पादयोः) । स्वाहा कीलकाय नमः (नाभौ) । विनियोगाय नमः (सर्वाङ्गे) । कर-हृदयादिन्यास--"महिषसिंहे हुं फट् ।" (इस मन्त्र से करे ।) ध्यान--अष्टो भुजाढ्यां महिषस्य मर्दिनीं सशंखचक्रां शरचापधारिणीम् । तां सूर्यकोटिप्रतिमां ललस्थितां दुर्गां सदा तां शरणं व्रजाम्यहम् ॥ मूलमन्त्र--"ॐ महिषमर्दिनि स्वाहा ।"

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