ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
नवाक्षरी दुर्गा मंत्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी

माँ नवाक्षरी दुर्गा ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र जप विधि -रुद्रयामल तंत्र

श्रीदेवताश्रीमहालक्ष्मी

दुर्गा साधनानौ दुर्गा मंत्रनवाक्षरी दुर्गा मंत्रमहालक्ष्मी साधनारुद्रयामल तंत्र

तंत्र संदर्भ

स्रोत में '११. शान्तिदुर्गादि नौ दुर्गाओं के मन्त्र-विधान' के अंतर्गत '९. नवाक्षरीदुर्गा' में नवाक्षरीदुर्गा मन्त्र का विनियोग, ऋष्यादिन्यास, कर-हृदयादिन्यास, ध्यान और मूल-मन्त्र दिया गया है।

मूल मंत्र

९. नवाक्षरीदुर्गा

विनियोग

अस्य श्रीनवाक्षरीदुर्गामन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषिः गायत्रीच्छन्दः श्रीमहालक्ष्मीदेवता ऐं बीजं ह्रीं शक्तिः क्लीं कीलकं मम श्रीमहालक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे मन्त्रजपे विनियोगः ।

ऋष्यादिन्यास

ब्रह्मणे ऋषये नमः (शिरसि) । गायत्रीच्छन्दसे नमः (मुखे) । श्रीमहालक्ष्मीदेवतायै नमः (हृदये) । ऐं बीजाय नमः (गुह्ये) । ह्रीं शक्तये नमः (पादयोः) । क्लीं कीलकाय नमः (नाभौ) । विनियोगाय नमः (सर्वाङ्गे) ।

कर-हृदयादिन्यास

"१. ऐं ह्रीं क्लीं, २. चामुण्डायै, ३. विच्चे" (इन तीन खण्डों से दो बार न्यास करें) ।

ध्यान

पूर्णेन्दुप्रतिमद्युतिं निजवतंसेन्दुशेखराप्लुतां,
भक्तानां कृपया कराग्रविलसद् दिव्यायुधैरापदः ।
क्रूरारिग्रहभूतरोगविपुलत्रासप्रदान् तत्क्षणात्,
संहृत्याशु तदिष्टदामिह महालक्ष्मीं सदा भावये ॥

मूल-मन्त्र

"ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" ।

बीज मंत्र

ऐंह्रींक्लीं

साधना विधि

स्रोत के अनुसार नवाक्षरीदुर्गा मन्त्रजप के लिए पहले विनियोग करना है। फिर ऋष्यादिन्यास और तीन खण्डों से दो बार कर-हृदयादिन्यास करके ध्यान के बाद मूल-मन्त्र का जप बताया गया है। इसी नौ दुर्गा मन्त्र-विधान के सामूहिक निर्देश में साधना के समय दुर्गा-पूजा को अत्यावश्यक कहा गया है।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • नवाक्षरी दुर्गा मन्त्रजप
  • श्रीमहालक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थ विनियोग
  • ऋष्यादिन्यास
  • तीन खण्डों से दो बार कर-हृदयादिन्यास
  • ध्यान और मूल-मन्त्र जप

लाभ

  • श्रीमहालक्ष्मीप्रसादसिद्धि
  • नवाक्षरी दुर्गा मन्त्रजप
  • सभी संकटों से रक्षा
  • दरिद्रताविनाश
  • सर्वविध कामनाओं की पूर्ति

मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)

९. नवाक्षरीदुर्गा--अस्य श्रीनवाक्षरीदुर्गामन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषिः गायत्रीच्छन्दः श्रीमहालक्ष्मीदेवता ऐं बीजं ह्रीं शक्तिः क्लीं कीलकं मम श्रीमहालक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे मन्त्रजपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यास--ब्रह्मणे ऋषये नमः (शिरसि) । गायत्रीच्छन्दसे नमः (मुखे) । श्रीमहालक्ष्मीदेवतायै नमः (हृदये) । ऐं बीजाय नमः (गुह्ये) । ह्रीं शक्तये नमः (पादयोः) । क्लीं कीलकाय नमः (नाभौ) । विनियोगाय नमः (सर्वाङ्गे) । कर-हृदयादिन्यास--"१. ऐं ह्रीं क्लीं, २. चामुण्डायै, ३. विच्चे" (इन तीन खण्डों से दो बार न्यास करें) । ध्यान--पूर्णेन्दुप्रतिमद्युतिं निजवतंसेन्दुशेखराप्लुतां, भक्तानां कृपया कराग्रविलसद् दिव्यायुधैरापदः । क्रूरारिग्रहभूतरोगविपुलत्रासप्रदान् तत्क्षणात्, संहृत्याशु तदिष्टदामिह महालक्ष्मीं सदा भावये ॥ मूल-मन्त्र--"ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" ।

[object Object]