नवाक्षरी दुर्गा मंत्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी
माँ नवाक्षरी दुर्गा ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र जप विधि -रुद्रयामल तंत्र
श्रीदेवता✦ श्रीमहालक्ष्मी
दुर्गा साधनानौ दुर्गा मंत्रनवाक्षरी दुर्गा मंत्रमहालक्ष्मी साधनारुद्रयामल तंत्र
तंत्र संदर्भ
स्रोत में '११. शान्तिदुर्गादि नौ दुर्गाओं के मन्त्र-विधान' के अंतर्गत '९. नवाक्षरीदुर्गा' में नवाक्षरीदुर्गा मन्त्र का विनियोग, ऋष्यादिन्यास, कर-हृदयादिन्यास, ध्यान और मूल-मन्त्र दिया गया है।
मूल मंत्र
९. नवाक्षरीदुर्गा विनियोग अस्य श्रीनवाक्षरीदुर्गामन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषिः गायत्रीच्छन्दः श्रीमहालक्ष्मीदेवता ऐं बीजं ह्रीं शक्तिः क्लीं कीलकं मम श्रीमहालक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे मन्त्रजपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यास ब्रह्मणे ऋषये नमः (शिरसि) । गायत्रीच्छन्दसे नमः (मुखे) । श्रीमहालक्ष्मीदेवतायै नमः (हृदये) । ऐं बीजाय नमः (गुह्ये) । ह्रीं शक्तये नमः (पादयोः) । क्लीं कीलकाय नमः (नाभौ) । विनियोगाय नमः (सर्वाङ्गे) । कर-हृदयादिन्यास "१. ऐं ह्रीं क्लीं, २. चामुण्डायै, ३. विच्चे" (इन तीन खण्डों से दो बार न्यास करें) । ध्यान पूर्णेन्दुप्रतिमद्युतिं निजवतंसेन्दुशेखराप्लुतां, भक्तानां कृपया कराग्रविलसद् दिव्यायुधैरापदः । क्रूरारिग्रहभूतरोगविपुलत्रासप्रदान् तत्क्षणात्, संहृत्याशु तदिष्टदामिह महालक्ष्मीं सदा भावये ॥ मूल-मन्त्र "ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" ।
बीज मंत्र
ऐंह्रींक्लीं
साधना विधि
स्रोत के अनुसार नवाक्षरीदुर्गा मन्त्रजप के लिए पहले विनियोग करना है। फिर ऋष्यादिन्यास और तीन खण्डों से दो बार कर-हृदयादिन्यास करके ध्यान के बाद मूल-मन्त्र का जप बताया गया है। इसी नौ दुर्गा मन्त्र-विधान के सामूहिक निर्देश में साधना के समय दुर्गा-पूजा को अत्यावश्यक कहा गया है।
प्रयोग — कब और कहाँ
- नवाक्षरी दुर्गा मन्त्रजप
- श्रीमहालक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थ विनियोग
- ऋष्यादिन्यास
- तीन खण्डों से दो बार कर-हृदयादिन्यास
- ध्यान और मूल-मन्त्र जप
लाभ
- श्रीमहालक्ष्मीप्रसादसिद्धि
- नवाक्षरी दुर्गा मन्त्रजप
- सभी संकटों से रक्षा
- दरिद्रताविनाश
- सर्वविध कामनाओं की पूर्ति
मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)
९. नवाक्षरीदुर्गा--अस्य श्रीनवाक्षरीदुर्गामन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषिः गायत्रीच्छन्दः श्रीमहालक्ष्मीदेवता ऐं बीजं ह्रीं शक्तिः क्लीं कीलकं मम श्रीमहालक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे मन्त्रजपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यास--ब्रह्मणे ऋषये नमः (शिरसि) । गायत्रीच्छन्दसे नमः (मुखे) । श्रीमहालक्ष्मीदेवतायै नमः (हृदये) । ऐं बीजाय नमः (गुह्ये) । ह्रीं शक्तये नमः (पादयोः) । क्लीं कीलकाय नमः (नाभौ) । विनियोगाय नमः (सर्वाङ्गे) । कर-हृदयादिन्यास--"१. ऐं ह्रीं क्लीं, २. चामुण्डायै, ३. विच्चे" (इन तीन खण्डों से दो बार न्यास करें) । ध्यान--पूर्णेन्दुप्रतिमद्युतिं निजवतंसेन्दुशेखराप्लुतां, भक्तानां कृपया कराग्रविलसद् दिव्यायुधैरापदः । क्रूरारिग्रहभूतरोगविपुलत्रासप्रदान् तत्क्षणात्, संहृत्याशु तदिष्टदामिह महालक्ष्मीं सदा भावये ॥ मूल-मन्त्र--"ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" ।
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