साम्राज्यलक्ष्मी मंत्र और हरि मंत्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी
माँ साम्राज्य लक्ष्मी सर्वसाम्राज्य सिद्धि मंत्र और हरि मंत्र -रुद्रयामल तंत्र
श्रीदेवता✦ साम्राज्यदायिनी लक्ष्मी
लक्ष्मी साधनाकमला साधनासाम्राज्य लक्ष्मी मंत्रहरि मंत्ररुद्रयामल तंत्र
तंत्र संदर्भ
स्रोत में '१०. महाविद्या श्रीकमला की उपासना' के अंतर्गत '(च) साम्राज्य-लक्ष्मी मन्त्र विधान और हरिमन्त्र' में साम्राज्यलक्ष्मी-मन्त्र और इनके भैरव हरि का मन्त्र एक साथ दिया गया है।
मूल मंत्र
(च) साम्राज्य-लक्ष्मी मन्त्र विधान और हरिमन्त्र साम्राज्यलक्ष्मी-मन्त्र श्रीं सह कलह रीं श्रीं । इसके ऋषि हरि हैं, गायत्री छन्द है, साम्राज्यदायिनी लक्ष्मी देवता, सह कलह रीं बीज, श्रीं शक्ति है। श्रां श्रीं आदि छह बीजों से न्यास होता है तथा ध्यान है— अतसीपुष्पसङ्काशां रत्नभूषणभूषिताम् । शंखचक्रगदापद्मशार्ङ्गबाणधरां करैः ॥१॥ षड्भिः कराभ्यां देवेशि वरदाभयशोभिताम् । एवमष्टभुजां ध्यायेत् सर्वसाम्राज्यसिद्धये ॥२॥ पूजन के लिए बिन्दु, षट्कोण, त्रिकोण, अष्टदल और भूपुर से युक्त यन्त्र बनायें। हरि-मन्त्र ॐ ह्रीं हरये नमः । यह सिद्ध मन्त्र है। अतः विनियोग और न्यास अपेक्षित नहीं हैं। ध्यान इस प्रकार है— शङ्खचक्रगदापद्मधरं पद्मासनस्थितम् । पीताम्बरं घनश्यामं स्मितं श्यामं हरिं भजे ॥
बीज मंत्र
श्रींसहकलहरींश्रांह्रीं
साधना विधि
स्रोत के अनुसार साम्राज्यलक्ष्मी-मन्त्र के ऋषि हरि, गायत्री छन्द, साम्राज्यदायिनी लक्ष्मी देवता, सह कलह रीं बीज और श्रीं शक्ति हैं। श्रां श्रीं आदि छह बीजों से न्यास कर ध्यान करना बताया गया है। पूजन के लिए बिन्दु, षट्कोण, त्रिकोण, अष्टदल और भूपुर से युक्त यन्त्र बनाना है। इनके भैरव हरि का मन्त्र सिद्ध मन्त्र कहा गया है, इसलिए उसमें विनियोग और न्यास अपेक्षित नहीं हैं।
प्रयोग — कब और कहाँ
- साम्राज्यलक्ष्मी साधना
- सर्वसाम्राज्यसिद्धि
- हरि भैरव मन्त्र
- श्रां श्रीं आदि छह बीजों से न्यास
- यन्त्र पूजन
लाभ
- सर्वसाम्राज्यसिद्धि
- साम्राज्यलक्ष्मी उपासना
- हरि मन्त्र साधना
- यन्त्र पूजन
मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)
(च) साम्राज्य-लक्ष्मी मन्त्र विधान और हरिमन्त्र साम्राज्यलक्ष्मी-मन्त्र है—'श्रीं सह कलह रीं श्रीं' । इसके ऋषि हरि हैं, गायत्री छन्द है, साम्राज्यदायिनी लक्ष्मी देवता, सह कलह रीं बीज, श्रीं शक्ति है। श्रां श्रीं आदि छह बीजों से न्यास होता है तथा ध्यान है— अतसीपुष्पसङ्काशां रत्नभूषणभूषिताम् । शंखचक्रगदापद्मशार्ङ्गबाणधरां करैः ॥१॥ षड्भिः कराभ्यां देवेशि वरदाभयशोभिताम् । एवमष्टभुजां ध्यायेत् सर्वसाम्राज्यसिद्धये ॥२॥ पूजन के लिए बिन्दु, षट्कोण, त्रिकोण, अष्टदल और भूपुर से युक्त यन्त्र बनायें। इनके भैरव हरि का मन्त्र है—'ॐ ह्रीं हरये नमः' । यह सिद्ध मन्त्र है। अतः विनियोग और न्यास अपेक्षित नहीं हैं। ध्यान इस प्रकार है— शङ्खचक्रगदापद्मधरं पद्मासनस्थितम् । पीताम्बरं घनश्यामं स्मितं श्यामं हरिं भजे ॥
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