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श्रीविद्या ब्रह्मविद्या कादि उन्मनी मंत्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी

महात्रिपुर सुन्दरी ब्रह्मविद्या कादि उन्मनी वरुणोपासिता मंत्र -रुद्रयामल तंत्र

श्रीदेवताश्रीसुन्दरी / महात्रिपुर सुन्दरी

श्रीविद्या साधनामहात्रिपुर सुन्दरी उपासनाशक्ति साधनारुद्रयामल तंत्र

तंत्र संदर्भ

स्रोत में रुद्रयामल से सम्बद्ध त्रिकूटा-रहस्य के अंतर्गत श्रीसुन्दरी के भिन्न-भिन्न उपासकों द्वारा दृष्ट मंत्रों की तालिका में यह ब्रह्मविद्या, कादि, उन्मनी तथा वरुणोपासिता सम्बद्ध मंत्र दिया गया है।

मूल मंत्र

५. ऐं क्लीं सौः क ५ सौः क्लीं ऐं ओं ऐं क्लीं सौः हूं सौः
क्लीं ऐं ओं कलईसार (ब्रह्मविद्या, कादि, उन्मनी) क्लीं
हः स ह क ल ह्रीं (वरुणोपासिता)

बीज मंत्र

ऐंक्लींसौःक ५ओंहूंहःह्रीं

साधना विधि

स्रोत के इस अंश में मंत्र को श्रीसुन्दरी के मंत्रों की तालिका में ब्रह्मविद्या, कादि, उन्मनी तथा वरुणोपासिता संकेतों के साथ दिया गया है। इस मंत्र के लिए अलग जप-विधि इस अंश में नहीं दी गयी है।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • श्रीविद्या उपासना
  • श्रीसुन्दरी मंत्र
  • ब्रह्मविद्या मंत्र
  • कादि उन्मनी मंत्र
  • वरुणोपासिता मंत्र
  • त्रिकूटा-रहस्य मंत्र तालिका

मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)

'त्रिकूटा-रहस्य' श्री विद्या के पंचदशी मंत्र में आने वाले तीन कूट जिन्हें--१. वाग्भव, २. कामराज, तथा ३. शक्तिकूट के नामों से भी जाना जाता है--से सम्बद्ध है। शाक्तोपासना के रहस्यों को बहुत ही गम्भीरता से इस ग्रंथ में प्रस्तुत किया गया है। श्रीसुन्दरी के मंत्रों की जो यहां तालिका मिलती है, उसमें इस विद्या के भिन्न-भिन्न उपासकों द्वारा दृष्ट मंत्रों का भी निर्देश है। उदाहरणार्थ निम्नलिखित मंत्र द्रष्टव्य हैं-- ५. ऐं क्लीं सौः क ५ सौः क्लीं ऐं ओं ऐं क्लीं सौः हूं सौः क्लीं ऐं ओं कलईसार (ब्रह्मविद्या, कादि, उन्मनी) क्लीं हः स ह क ल ह्रीं (वरुणोपासिता)

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