श्रीविद्या लोपामुद्रा सप्तदशी मंत्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी
महात्रिपुर सुन्दरी लोपामुद्रा सप्तदशी और अष्टादशी बीज मंत्र -रुद्रयामल तंत्र
श्रीदेवता✦ श्रीसुन्दरी / महात्रिपुर सुन्दरी
श्रीविद्या साधनामहात्रिपुर सुन्दरी उपासनाशक्ति साधनारुद्रयामल तंत्र
तंत्र संदर्भ
स्रोत में रुद्रयामल से सम्बद्ध त्रिकूटा-रहस्य के अंतर्गत श्रीसुन्दरी के भिन्न-भिन्न उपासकों द्वारा दृष्ट मंत्रों की तालिका में यह लोपामुद्रा सप्तदशी मंत्र और उससे सम्बद्ध अष्टादशी बीज निर्देश दिया गया है।
मूल मंत्र
३. हसकल ह्रीं। हसकलह ह्रीं हः। सकलह ह्रीं। (लोपामुद्रा सप्तदशी) ए हः क्लीं हसौः सः
बीज मंत्र
हसकलहसकलहसकलहह्रींहःएक्लींहसौःसः
साधना विधि
स्रोत के अनुसार ए हः क्लीं हसौः सः इन बीजों को सप्तदशी में जोड़ने से अष्टादशी विद्या बनती है तथा नौ लाख जप के पश्चात् इसका जप किया जाता है।
प्रयोग — कब और कहाँ
- श्रीविद्या उपासना
- श्रीसुन्दरी मंत्र
- लोपामुद्रा सप्तदशी मंत्र
- अष्टादशी विद्या बीज निर्देश
- त्रिकूटा-रहस्य मंत्र तालिका
मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)
'त्रिकूटा-रहस्य' श्री विद्या के पंचदशी मंत्र में आने वाले तीन कूट जिन्हें--१. वाग्भव, २. कामराज, तथा ३. शक्तिकूट के नामों से भी जाना जाता है--से सम्बद्ध है। शाक्तोपासना के रहस्यों को बहुत ही गम्भीरता से इस ग्रंथ में प्रस्तुत किया गया है। श्रीसुन्दरी के मंत्रों की जो यहां तालिका मिलती है, उसमें इस विद्या के भिन्न-भिन्न उपासकों द्वारा दृष्ट मंत्रों का भी निर्देश है। उदाहरणार्थ निम्नलिखित मंत्र द्रष्टव्य हैं-- ३. हसकल ह्रीं। हसकलह ह्रीं हः। सकलह ह्रीं। (लोपामुद्रा सप्तदशी) ए हः क्लीं हसौः सः सप्तदशी में इन बीजों को जोड़ने से अष्टादशी विद्या बनती है तथा नौ लाख जप के पश्चात् इसका जप किया जाता है।
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