सहदेव्यासुरी मन्त्र प्रयोगरुद्रयामल तंत्रहिन्दी
सहदेव्यासुरी मंत्र प्रयोग और एक हजार जप विधि -रुद्रयामल तंत्र
श्रीदेवता✦ सहदेव्यासुरी
सहदेव्यासुरी मंत्रआसुरी दुर्गा अन्य प्रयोगतांत्रिक मंत्र प्रयोगरुद्रयामल तंत्र
तंत्र संदर्भ
स्रोत में आसुरी-दुर्गा मन्त्र-प्रयोग के अंतर्गत '३. अन्य प्रयोग' में तीसरा प्रयोग सहदेव्यासुरी प्रयोग के रूप में दिया गया है।
मूल मंत्र
३. सहदेव्यासुरी का प्रयोग इस प्रकार है : इसमें सहदेवी लाकर उसकी प्रतिष्ठा और पूजन करे तथा काक आसन से बैठकर एक पैर का अंगूठा चलाते हुए--"ॐ ह्रीं सहदेव्यासुरि तिष्ठ तिष्ठ कि पुरुषि ॐ किस किस्त्ये यः शक्यमसि किंवा सर्वदुष्टक्षयं कुरु कुरु स्वाहा" इस मन्त्र का १ हजार जप करे। इससे शत्रु का विनाश होता है।
बीज मंत्र
ॐह्रीं
साधना विधि
स्रोत के अनुसार सहदेवी लाकर उसकी प्रतिष्ठा और पूजन करे, काक आसन से बैठकर एक पैर का अंगूठा चलाते हुए मन्त्र का १ हजार जप करे। इसके बाद स्रोत में शत्रु-विनाश का फल और ऐसे प्रयोगों की कठिनता तथा अनिष्ट-प्रायश्चित सम्बन्धी सावधानी दी गई है।
प्रयोग — कब और कहाँ
- सहदेव्यासुरी प्रयोग
- सहदेवी प्रतिष्ठा और पूजन
- काक आसन से जप
- एक हजार मंत्र जप
- आसुरी-दुर्गा अन्य प्रयोग
लाभ
- शत्रु का विनाश
- सहदेव्यासुरी प्रयोग
- सहदेवी प्रतिष्ठा और पूजन
- एक हजार जप का स्रोत-विधान
मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)
३. सहदेव्यासुरी का प्रयोग इस प्रकार है : इसमें सहदेवी लाकर उसकी प्रतिष्ठा और पूजन करे तथा काक आसन से बैठकर एक पैर का अंगूठा चलाते हुए--"ॐ ह्रीं सहदेव्यासुरि तिष्ठ तिष्ठ कि पुरुषि ॐ किस किस्त्ये यः शक्यमसि किंवा सर्वदुष्टक्षयं कुरु कुरु स्वाहा" इस मन्त्र का १ हजार जप करे। इससे शत्रु का विनाश होता है। प्रतिक्रिया-शूलिनी दुर्गा एवं दुर्गातन्त्रोक्त ऐसे ही अन्य बहुत-से प्रयोग हैं, किन्तु ये अति कठिन हैं और इनके करने से किसी का अनिष्ट होने का प्रायश्चित लगता है जिसका निवारण न हो तो साधक को कष्ट उठाना पड़ता है। अतः ऐसे प्रयोग न करना ही उत्तम है। यह केवल परिचय के लिए लिखा है।
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