सहस्राक्षर मृत्युंजय माला मन्त्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी
सहस्राक्षर मृत्युंजय माला मंत्र -रुद्रयामल तंत्र
श्रीदेवता✦ सदाशिव मृत्युंजय त्रयम्बक
मृत्युंजय मन्त्रमाला मन्त्रसदाशिव उपासनारुद्रयामल तंत्र
तंत्र संदर्भ
स्रोत में यह २७. सहस्राक्षर-मृत्युंजय-मालामन्त्र शीर्षक से दिया गया है।
मूल मंत्र
ॐ नमो भगवते सदाशिवाय सकलतत्त्वात्मकाय सर्वमन्त्रस्वरूपाय सर्वयन्त्राधिष्ठिताय सर्वतन्त्रस्वरूपाय सर्वतत्त्वविदूराय ब्रह्मरुद्रावतारिणे नीलकण्ठाय पार्वतीप्रियाय सोमसूर्याग्निलोचनाय भस्मोद्धूलितविग्रहाय महामणिमुकुटधारणाय माणिक्यभूषणाय सृष्टिस्थितिप्रलयकालरौद्रावताराय दक्षाध्वरध्वंसकाय महाकालभेदकाय मूलाधारैकनिलयाय तत्त्वातीताय गंगाधराय सर्वदेवाधिदेवाय षडाश्रयाय वेदान्तसाराय त्रिवर्गसाधनायानेककोटिब्रह्माण्डनायकायानन्तवासुकितक्षककर्कोटकशंखकुलिकपद्ममहापद्मेत्यष्टनागकुलभूषणाय प्रणवस्वरूपाय चिदाकाशायाकाशादिस्वरूपाय ग्रहनक्षत्रमालिने सकलाय कलंकरहिताय सकललोकैककर्त्रे सकललोकैकसंहर्त्रे सकललोकैकभर्त्रे सकललोकैकसाक्षिणे सकलनिगमेड्याय सकलवेदान्तपारगाय सकललोकैकवरप्रदाय सकललोकैकशंकराय शशांकशेखराय शाश्वतनिजावासाय निराभासाय निरामयाय निर्मलाय निर्लोभाय निर्मोहाय निर्मदाय निश्चिन्ताय निरहंकाराय निराकुलाय निष्कलंकाय निर्गुणाय निष्कामाय निरूपप्लवाय निरवद्याय निरन्तराय निष्कारणाय निरातंकाय निष्प्रपञ्चाय निस्संगाय निर्द्वन्द्वाय निराधाराय नीरोगाय निष्क्रोधाय निर्गमाय निष्पापाय निर्भयाय निर्विकल्पाय निर्भेदाय निष्क्रियाय निस्तुलाय निस्संशयाय निरंजनाय निरूपमविभवाय नित्यशुद्धबुद्धपरिपूर्णसच्चिदानन्दादृश्याय परमशान्तस्वरूपाय तेजोरूपाय तेजोमयाय जय जय महा रौद्रभद्रावतारमहाभैरव कालभैरव कल्पान्तभैरव कपालमालाधर खट्वांग-खड्ग-पाशांकुशडमरू-त्रिशूल-चाप-बाण-गदा-शक्ति-भिन्दिपाल-तोमर-मुसल-मुद्गर-पट्टिश-परशु-परिघ-भुशुण्डी-शतघ्नी-चक्राद्यायुध-भीषणकरसहस्रमुखदंष्ट्राकरालविकटाट्टहासविस्फारित-ब्रह्माण्डमण्डलनागेन्द्रकुण्डलनागेन्द्रहारनागेन्द्रवलयनागेन्द्रचर्मधर मृत्युंजय त्रयम्बक त्रिपुरान्तक विरूपाक्ष विश्वेश्वर विश्वरूप वृषवाहन विश्वतोमुख सर्वतो मां रक्ष रक्ष ज्वल ज्वल महामृत्युभयमपमृत्युभयं नाशय नाशय रोगभयमुत्सादयोत्सादय विषसर्पभयं शमय शमय चौरान् मारय मारय मम शत्रूनुच्चाटयोच्चाटय त्रिशूलेन विदारय विदारय कुठारेण भिन्धि भिन्धि खड्गेन छिन्धि छिन्धि खट्वाङ्गेन विपोथय मुसलेन निष्पेषय निष्पेषय बाणैः सन्ताडय रक्षांसि भीषय भीषय भूतानि विद्रावय विद्रावय कूष्माण्ड-वेताल-मारीच-ब्रह्मराक्षसगणान् सन्त्रासय सन्त्रासय मामभयं कुरु कुरु वित्रस्तं मामाश्वासय नरकभयाद् मामुद्धरोद्धर सञ्जीवय सञ्जीवय क्षुत्तृड्भ्यां मामाप्याययाप्यायय दुःखातुरं मामानन्दयानन्दय शिवकवचेन मामाच्छादयाच्छादय मृत्युंजय त्रयम्बक सदाशिव नमस्ते नमस्ते नमस्ते स्वाहा।
प्रयोग — कब और कहाँ
- सहस्राक्षर मृत्युंजय माला मन्त्र
- रक्ष रक्ष जप
- महामृत्युभय और अपमृत्युभय नाश
- रोगभय और विषसर्पभय शमन
- शिवकवच
लाभ
- महामृत्युभयमपमृत्युभयं नाशय
- रोगभयमुत्सादयोत्सादय
- विषसर्पभयं शमय
- मामभयं कुरु
- मामुद्धरोद्धर
- सञ्जीवय सञ्जीवय
मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)
२७. सहस्राक्षर-मृत्युंजय-मालामन्त्र ॐ नमो भगवते सदाशिवाय सकलतत्त्वात्मकाय सर्वमन्त्रस्वरूपाय सर्वयन्त्राधिष्ठिताय सर्वतन्त्रस्वरूपाय सर्वतत्त्वविदूराय ब्रह्मरुद्रावतारिणे नीलकण्ठाय पार्वतीप्रियाय सोमसूर्याग्निलोचनाय भस्मोद्धूलितविग्रहाय महामणिमुकुटधारणाय माणिक्यभूषणाय सृष्टिस्थितिप्रलयकालरौद्रावताराय दक्षाध्वरध्वंसकाय महाकालभेदकाय मूलाधारैकनिलयाय तत्त्वातीताय गंगाधराय सर्वदेवाधिदेवाय षडाश्रयाय वेदान्तसाराय त्रिवर्गसाधनायानेककोटिब्रह्माण्डनायकायानन्तवासुकितक्षककर्कोटकशंखकुलिकपद्ममहापद्मेत्यष्टनागकुलभूषणाय प्रणवस्वरूपाय चिदाकाशायाकाशादिस्वरूपाय ग्रहनक्षत्रमालिने सकलाय कलंकरहिताय सकललोकैककर्त्रे सकललोकैकसंहर्त्रे सकललोकैकभर्त्रे सकललोकैकसाक्षिणे सकलनिगमेड्याय सकलवेदान्तपारगाय सकललोकैकवरप्रदाय सकललोकैकशंकराय शशांकशेखराय शाश्वतनिजावासाय निराभासाय निरामयाय निर्मलाय निर्लोभाय निर्मोहाय निर्मदाय निश्चिन्ताय निरहंकाराय निराकुलाय निष्कलंकाय निर्गुणाय निष्कामाय निरूपप्लवाय निरवद्याय निरन्तराय निष्कारणाय निरातंकाय निष्प्रपञ्चाय निस्संगाय निर्द्वन्द्वाय निराधाराय नीरोगाय निष्क्रोधाय निर्गमाय निष्पापाय निर्भयाय निर्विकल्पाय निर्भेदाय निष्क्रियाय निस्तुलाय निस्संशयाय निरंजनाय निरूपमविभवाय नित्यशुद्धबुद्धपरिपूर्णसच्चिदानन्दादृश्याय परमशान्तस्वरूपाय तेजोरूपाय तेजोमयाय जय जय महा रौद्रभद्रावतारमहाभैरव कालभैरव कल्पान्तभैरव कपालमालाधर खट्वांग-खड्ग-पाशांकुशडमरू-त्रिशूल-चाप-बाण-गदा-शक्ति-भिन्दिपाल-तोमर-मुसल-मुद्गर-पट्टिश-परशु-परिघ-भुशुण्डी-शतघ्नी-चक्राद्यायुध-भीषणकरसहस्रमुखदंष्ट्राकरालविकटाट्टहासविस्फारित-ब्रह्माण्डमण्डलनागेन्द्रकुण्डलनागेन्द्रहारनागेन्द्रवलयनागेन्द्रचर्मधर मृत्युंजय त्रयम्बक त्रिपुरान्तक विरूपाक्ष विश्वेश्वर विश्वरूप वृषवाहन विश्वतोमुख सर्वतो मां रक्ष रक्ष ज्वल ज्वल महामृत्युभयमपमृत्युभयं नाशय नाशय रोगभयमुत्सादयोत्सादय विषसर्पभयं शमय शमय चौरान् मारय मारय मम शत्रूनुच्चाटयोच्चाटय त्रिशूलेन विदारय विदारय कुठारेण भिन्धि भिन्धि खड्गेन छिन्धि छिन्धि खट्वाङ्गेन विपोथय मुसलेन निष्पेषय निष्पेषय बाणैः सन्ताडय रक्षांसि भीषय भीषय भूतानि विद्रावय विद्रावय कूष्माण्ड-वेताल-मारीच-ब्रह्मराक्षसगणान् सन्त्रासय सन्त्रासय मामभयं कुरु कुरु वित्रस्तं मामाश्वासय नरकभयाद् मामुद्धरोद्धर सञ्जीवय सञ्जीवय क्षुत्तृड्भ्यां मामाप्याययाप्यायय दुःखातुरं मामानन्दयानन्दय शिवकवचेन मामाच्छादयाच्छादय मृत्युंजय त्रयम्बक सदाशिव नमस्ते नमस्ते नमस्ते स्वाहा।
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