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सिद्ध शालग्राम मन्त्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी

सिद्ध शालग्राम मंत्र विधि और सर्वाभीष्ट फल प्राप्ति जप -रुद्रयामल तंत्र

श्रीदेवताश्रीलक्ष्मीनारायण

शालग्राम मंत्रविष्णु मंत्रलक्ष्मी नारायण मंत्रसर्वाभीष्ट फल प्राप्ति मंत्ररुद्रयामल तंत्र

तंत्र संदर्भ

स्रोत में सिद्ध शालग्राम मन्त्र विधि के अंतर्गत विनियोग, ऋष्यादिन्यास, कर-हृदयादिन्यास, ध्यान और मूल मन्त्र दिया गया है। विनियोग में सर्वाभीष्टफल प्राप्ति का उद्देश्य बताया गया है।

मूल मंत्र

(घ) सिद्ध शालग्राम मन्त्र विधि--अस्य श्री शालग्राम मन्त्रस्य
साध्य नारायण ऋषिः अनुष्टुप् छन्दः श्रीलक्ष्मीनारायणो देवता मम
सर्वाभीष्टफल प्राप्तये जपे विनियोगः।

ऋष्यादिन्यास--साध्यनारायणर्षये नमः (शिरसि), अनुष्टुप्
छन्दसे नमः (मुखे), श्रीलक्ष्मीनारायणदेवतायै नमः (हृदये) विनियोगाय
नमः (सर्वांगे)।

कर-हृदयादिन्यास--ॐ नमो भगवते (अंगु० हृदयाय०), विष्णवे
(तर्जनी० शिरसे०) श्रीशालग्रामनिवासिने (मध्यमा० शिखायै०) सर्वा-
भीष्टफलप्रदाय (अना० कवचाय०), सकलदुरितनिवारणे (कनि०
नेत्रद्वयाय), शालग्रामाय स्वाहा (करतल० अस्त्राय०)।

ध्यान--तुल्यप्रभं तपनकोटिभिरब्जचक्र-
कौमोदकी-दरविराजित-पाणिपद्मम्।
लक्ष्मीमहीसहितमातविचित्रभूषं,
नारायणं कपिशवाससमाश्रयामि॥

मूल मन्त्र--ॐ नमो भगवते विष्णवे श्रीशालग्रामनिवासिने
सर्वाभीष्टफलप्रदाय सकलदुरितनिवारिणे शालग्रामाय स्वाहा।

बीज मंत्र

साधना विधि

स्रोत में सिद्ध शालग्राम मन्त्र के लिए विनियोग, ऋष्यादिन्यास, कर-हृदयादिन्यास और ध्यान के बाद मूल मन्त्र 'ॐ नमो भगवते विष्णवे श्रीशालग्रामनिवासिने सर्वाभीष्टफलप्रदाय सकलदुरितनिवारिणे शालग्रामाय स्वाहा' दिया गया है।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • सिद्ध शालग्राम मन्त्र जप
  • सर्वाभीष्टफल प्राप्ति
  • सकलदुरितनिवारण
  • विनियोग
  • ऋष्यादिन्यास
  • कर-हृदयादिन्यास
  • ध्यान

लाभ

  • सर्वाभीष्टफल प्राप्ति के लिए जप विनियोग दिया गया
  • सकलदुरितनिवारण का मूल मन्त्र में उल्लेख है

मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)

(घ) सिद्ध शालग्राम मन्त्र विधि--अस्य श्री शालग्राम मन्त्रस्य साध्य नारायण ऋषिः अनुष्टुप् छन्दः श्रीलक्ष्मीनारायणो देवता मम सर्वाभीष्टफल प्राप्तये जपे विनियोगः। ऋष्यादिन्यास--साध्यनारायणर्षये नमः (शिरसि), अनुष्टुप् छन्दसे नमः (मुखे), श्रीलक्ष्मीनारायणदेवतायै नमः (हृदये) विनियोगाय नमः (सर्वांगे)। कर-हृदयादिन्यास--ॐ नमो भगवते (अंगु० हृदयाय०), विष्णवे (तर्जनी० शिरसे०) श्रीशालग्रामनिवासिने (मध्यमा० शिखायै०) सर्वा- भीष्टफलप्रदाय (अना० कवचाय०), सकलदुरितनिवारणे (कनि० नेत्रद्वयाय), शालग्रामाय स्वाहा (करतल० अस्त्राय०)। ध्यान--तुल्यप्रभं तपनकोटिभिरब्जचक्र- कौमोदकी-दरविराजित-पाणिपद्मम्। लक्ष्मीमहीसहितमातविचित्रभूषं, नारायणं कपिशवाससमाश्रयामि॥ मूल मन्त्र--ॐ नमो भगवते विष्णवे श्रीशालग्रामनिवासिने सर्वाभीष्टफलप्रदाय सकलदुरितनिवारिणे शालग्रामाय स्वाहा।

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