का सरल उत्तर
अकाल मृत्यु में आत्मा की सामान्य यात्रा बाधित होती है। वह लिंग शरीर में प्रेत योनि को प्राप्त होकर भुवर्लोक के घने वायुमंडल में तीव्र वायु के बीच बिना आश्रय के फंस जाती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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