का सरल उत्तर
जब सत्य भीतर प्रत्यक्ष अनुभव बन जाए, वह अपरोक्ष ज्ञान है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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