का सरल उत्तर
अर्जुन को अंतर्धान अस्त्र दो स्रोतों से मिला — गुरु द्रोणाचार्य से और देवता कुबेर से। यह दोहरा शिक्षण उनकी पूर्ण महारत का प्रतीक है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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