का सरल उत्तर
अश्विनी मुद्रा ब्रह्मचर्य पालन में सहायक है, प्राण ऊर्जा का संरक्षण करती है और उसे ऊर्ध्वगामी बनाती है — यह आंतरिक ऊर्जा संतुलन का साधन है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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