का सरल उत्तर
बटुक भैरव मंत्र: 'ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा' — इसमें 'ह्रीं' का दोहरा प्रयोग भैरव की शक्ति (भैरवी) को तुरंत सक्रिय करके संकट और बाधाएं दूर करने के लिए है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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