बीज मंत्र को 'मंत्रों का प्राण' क्यों कहते हैं?
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सरल उत्तर
जैसे प्राण के बिना शरीर निर्जीव है — वैसे बीज के बिना कोई भी बड़ा मंत्र शक्तिहीन और चैतन्य-रहित होता है। बीज ही मंत्र में चेतना का संचार करता है और उसे फलदायी बनाता है — इसीलिए बीज मंत्र 'मंत्रों का प्राण' कहलाते हैं।
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बीज मंत्र परिचय
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