का सरल उत्तर
ऋषियों ने योग-शक्ति से ब्रह्मांडीय नाद-सागर में डुबकी लगाकर दैवीय शक्तियों की घनीभूत और सार-रूप ध्वनि-तरंगों को सुना और अनुभव किया — वही बीज मंत्र कहलाए। ये मनुष्य की रचना नहीं, देव-शक्तियों के ध्वन्यात्मक स्वरूप हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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