का सरल उत्तर
निष्काम कर्म = फल की आसक्ति बिना कर्तव्य कर्म। गीता 2.47 — कर्म करो, फल में आसक्ति मत रखो। कर्म ईश्वर को अर्पित (9.27), सुख-दुख में समान (2.48)। आलस्य नहीं — पूर्ण समर्पण से कर्म करो, फल ईश्वर पर छोड़ो। परिणाम: चित्त शुद्धि → मोक्ष।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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