का सरल उत्तर
भैरव साधना का लक्ष्य द्वैत से अद्वैत की यात्रा है: 'नमः' से अहंकार विसर्जन → 'ह्रीं' से भैरवी शक्ति जागृति → 'क्लीं' से ऊर्जा को इच्छापूर्ति के लिए निर्देशित करना। साधक शिव-शक्ति के ब्रह्मांडीय खेल का हिस्सा बनता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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