का सरल उत्तर
उपनिषद श्लोक 58: सृष्टि के 5 कारक — अस्ति, भाति, प्रिय, रूप, नाम। पहले तीन (सत्-चित्-आनंद) = ब्रह्म से संबंधित। 'नाम' और 'रूप' = नश्वर संसार। सरस्वती नाम-रूप का मिथ्यात्व नष्ट कर सत्य-चित्-आनंद का बोध कराती हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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