का सरल उत्तर
वैदिक साहित्य: दक्षिणायन = 'पितृयान' (पितरों का मार्ग); उत्तरायण = 'देवयान' (देवताओं का मार्ग)। मकर संक्रांति = उत्तरायण का प्रथम दिन = दक्षिणायन की समाप्ति → पितरों की विदाई → तर्पण अनिवार्य।
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