का सरल उत्तर
इसका अर्थ शरीर को नश्वर मानने के बजाय उसे देवता का जाग्रत और दिव्य मंदिर समझना है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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