ध्यान में निर्विकल्प समाधि का अनुभव कैसा होता है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
'मैं' शून्य, विषय-वस्तु-ज्ञाता=एक, अनंत, सत्-चित्-आनंद, शब्दातीत। पतंजलि: 'द्रष्टा स्वरूप स्थित।' 1 क्षण = कृतार्थ। स्थिर = अत्यंत दुर्लभ (रामकृष्ण)।
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