का सरल उत्तर
दिव्यास्त्र की जिम्मेदारी थी कि योद्धा को चलाने के साथ वापस लेने का मंत्र भी सीखना होता था। अन्यथा अश्वत्थामा की तरह अनर्थ हो सकता था।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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