दुर्गा सप्तशती पाठ के दौरान कवच किलक अर्गला का क्या महत्व है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
कवच = बीज/रक्षा (शरीर सुरक्षा)। अर्गला = शक्ति/बाधा हटाना। कीलक = चाबी/फल प्राप्ति। क्रम: शापोद्धार→कवच→अर्गला→कीलक→13 अध्याय। बिना इनके = अधूरा। विकल्प: सिद्ध कुंजिका स्तोत्र (इनकी जरूरत नहीं)।
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दुर्गा सप्तशती
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