का सरल उत्तर
दार्शनिक रूप से इसका मतलब है कि भगवान का 'साकार रूप' (गणेश जी की मूर्ति) अंत में 'अरूप और अनंत सत्ता' (भगवान विष्णु) में जाकर मिल जाता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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